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रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित भविष्य गढ़ने में सहायक होगा – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने 6 विश्वविद्यालयों के साथ किया एमओयू

देश का पहला पाठ्यक्रम—छात्रों को मिलेगी बाल अधिकार एवं संरक्षण की जानकारी

KPN24:- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों के बीच महत्वपूर्ण “रक्षक पाठ्यक्रम” को लागू करने हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। बाल अधिकार और संरक्षण विषय पर आधारित यह अभिनव पाठ्यक्रम देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक मॉडल माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इसे बच्चों की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने वाला कदम बताते हुए कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” उन्होंने कहा कि यह न केवल युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर खोलेगा, बल्कि बाल संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता भी उपलब्ध कराएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार बच्चे अनजाने में गलत दिशा में भटक जाते हैं, ऐसे में उनका मार्गदर्शन करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा कर चुकी है। किसानों के बोनस से लेकर महिलाओं हेतु महतारी वंदन योजना और सबके लिए आवास जैसे संकल्पों को साकार किया गया है। साथ ही 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार लागू कर राज्य सुशासन की ओर तेजी से अग्रसर है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने रिकॉर्ड समय में पाठ्यक्रम तैयार करने और विश्वविद्यालयों में लागू कराने के लिए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और टीम को बधाई दी।

“संवेदनशील और सेवा-भाव से युक्त युवा तैयार करेगा यह पाठ्यक्रम” – मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में अभी भी अनेक चुनौतियाँ मौजूद हैं—भिक्षावृत्ति, परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास, संवेदनशील मामलों का समाधान आदि। उन्होंने कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगा और राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की पहचान को मजबूत करेगा।”

ऐतिहासिक कदम – उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने इसे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक पहल बताते हुए आयोग और सभी छह विश्वविद्यालयों को बधाई दी।

इन विश्वविद्यालयों में शुरू होगा एक वर्षीय रक्षक पाठ्यक्रम

एक वर्षीय स्नातकोत्तर “पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन” निम्न विश्वविद्यालयों में प्रारंभ किया जाएगा—

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर

आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर

एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर

श्री शंकराचार्य प्रोफ़ेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग

क्या है ‘रक्षक पाठ्यक्रम’?

छत्तीसगढ़ के किसी भी विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था जो युवाओं को बाल अधिकार संरक्षण क्षेत्र में व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए रोजगार उपलब्ध कराए। इस आवश्यकता को देखते हुए आयोग ने “रक्षक – बाल अधिकार संरक्षण पर एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम” विकसित किया है।

इसमें छात्रों को—

बाल अधिकार एवं संरक्षण से संबंधित विधिक ज्ञान

विभागीय योजनाओं, संस्थाओं और प्रक्रियाओं की समझ

बाल संरक्षण इकाइयों के कार्यों की जानकारी

संवेदनशीलता और जागरूकता विकसित करने हेतु विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। आयोग पाठ्यक्रम संचालन, प्रशिक्षण और परामर्श की संपूर्ण सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराएगा।

कार्यक्रम में उपस्थित रहे

आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से कुलसचिव प्रो. शैलेंद्र पटेल, प्रो. ए.के. श्रीवास्तव, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा के कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव शारदा प्रसाद त्रिपाठी, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति एवं रायपुर संभाग आयुक्त महादेव कावरे, कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा, आंजनेय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. टी. रामाराव, कुलसचिव डॉ. रूपाली चौधरी, एमिटी विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. पीयूष कांत पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. सुरेश ध्यानी, शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई-दुर्ग के चांसलर डॉ. आई.पी. मिश्रा, कुलपति डॉ. ए.के. झा, डॉ. जया मिश्रा तथा आयोग के सचिव प्रतीक खरे सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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Author: Kpn 24

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