"हर खबर, आपकी नज़र"

kpn 24

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया बस्तर पंडुम 2026 के लोगो एवं थीम गीत का विमोचन

KPN24:- बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से वर्ष 2026 में भी ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन भव्य एवं आकर्षक स्वरूप में किया जाएगा। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा स्थित माँ दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात बस्तर पंडुम 2026 के लोगो एवं थीम गीत का विमोचन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। यह हमारी जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत को सहेजने एवं विश्व पटल पर पहचान दिलाने का सशक्त मंच है। माँ दंतेश्वरी के पावन आशीर्वाद से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ होना हम सभी के लिए गर्व का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में निहित है। नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुडि़यों के माध्यम से हमारी संस्कृति जीवंत रहती है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बस्तर पंडुम को अपार जनसमर्थन मिला था और समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति ने आयोजन को नई ऊँचाई दी। इस वर्ष राष्ट्रपति, केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री तथा विभिन्न देशों के राजदूतों को आमंत्रित करने का प्रस्ताव है, जिससे बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान मिल सके।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जानकारी दी कि इस वर्ष बस्तर पंडुम प्रतियोगिताओं की विधाओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति के साथ शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन एवं पेय, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि को शामिल किया गया है। प्रतियोगिताओं का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र ही नहीं, बल्कि शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का प्रतीक भी बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई दिशा दे रही है। यह उत्सव संदेश देता है कि बस्तर अब संघर्ष नहीं, बल्कि सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘पंडुम’ का अर्थ पर्व होता है और बस्तर में परंपरागत रूप से पर्व माता के आशीर्वाद से आरंभ किए जाते हैं। इसी परंपरा के तहत माँ दंतेश्वरी के मंदिर परिसर से बस्तर पंडुम 2026 की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं और मार्च 2026 तक लाल आतंक के समाप्त होने का विश्वास जताया।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति और परंपराएँ गर्व का विषय हैं। पौराणिक दंडकारण्य क्षेत्र में स्थित बस्तर की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि लगातार दूसरे वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन कर सरकार सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण देने की दिशा में कार्य कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने मंदिर प्रांगण में संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, समाज प्रमुखों एवं पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकारों से संवाद किया। कार्यक्रम को बस्तर सांसद महेश कश्यप एवं दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटमी ने भी संबोधित किया। समाज प्रमुखों ने बस्तर पंडुम के आयोजन हेतु सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।
उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में होगा।
10 से 20 जनवरी: जनपद स्तरीय कार्यक्रम
24 से 29 जनवरी: जिला स्तरीय कार्यक्रम
2 से 6 फरवरी: संभाग स्तरीय कार्यक्रम
इस आयोजन में बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों एवं 1 नगर निगम क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रतिभागियों के पंजीयन हेतु ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध रहेंगे। आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।
इस अवसर पर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, बस्तर आईजी सुंदरराज पी., संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव, पुलिस अधीक्षक गौरव राय सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

Kpn 24
Author: Kpn 24

Leave a Comment

Read More