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जनजातीय विकास को सांसद संकुल विकास परियोजना से मिलेगी नई रफ्तार – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

KPN24:- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सांसद संकुल विकास परियोजना से प्रदेश के जनजातीय अंचलों के विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित परियोजना की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से जनजातीय समाज को स्वरोजगार से जोड़ने की ठोस पहल की जा रही है, जिससे पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में जनजातीय क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सांसद संकुल विकास परियोजना के अंतर्गत गांवों के क्लस्टर बनाकर विकास का एक प्रभावी मॉडल तैयार किया गया है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय नागरिकों को मिल रहा है। योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग से कौशल विकास कर लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यहां धान की अनेक किस्में उपलब्ध हैं, जिनके निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं। कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन, बकरी पालन, गौ पालन एवं शूकर पालन जैसे गतिविधियों से ग्रामीणों को जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सकता है। जनजातीय समुदाय द्वारा परंपरागत रूप से उत्पादित महुआ, इमली, चिरौंजी जैसे वनोपजों का वैल्यू एडिशन कर बाजार से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की नई उद्योग नीति में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सांसद संकुल विकास परियोजना से जुड़े जनप्रतिनिधि और विकास सहयोगी यह सुनिश्चित करें कि जनजातीय क्षेत्रों को नई उद्योग नीति का पूरा लाभ मिले। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी की जाएगी।

बैठक में वी. सतीश ने सांसद संकुल विकास परियोजना की परिकल्पना, उद्देश्यों और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह योजना जनजातीय क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर सृजित कर पलायन रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे जनजातीय बहुल राज्यों में सरकार, जनप्रतिनिधियों, एनजीओ और आमजन के संयुक्त प्रयास से समग्र विकास किया जा रहा है।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि विभिन्न विभागों के शासकीय अधिकारियों को संकुल से जुड़े गांवों के विकास में पूरी निष्ठा से अपनी भूमिका निभानी चाहिए। स्थानीय आवश्यकताओं की समझ के साथ कौशल विकास कर स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
बैठक में रायगढ़ के लैलूंगा संकुल, सरगुजा के परशुरामपुर संकुल, बस्तर के बकावंड संकुल, बलरामपुर के माता राजमोहिनी देवी संकुल तथा केशकाल के धनोरा संकुल में किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई।

इस अवसर पर सांसद भोजराज नाग, चिंतामणि महाराज, राधेश्याम राठिया, देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, श्रीमती गोमती साय, प्रसाद इंडेप, कपिल सहस्त्रबुद्धे सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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Author: Kpn 24

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