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जांजगीर-चांपा की बेटी ने रचा इतिहास: फार्मेसी में पीएचडी हासिल कर डॉ. शांभवी सिंह ने बढ़ाया जिले का मान

KPN24:- जांजगीर-चांपा जिले की होनहार बेटी डॉ. शांभवी सिंह ने फार्मेसी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। मंदसौर विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें फार्मेसी विषय में पीएचडी (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी) की उपाधि प्रदान की गई है। इस सफलता के साथ ही नगर में खुशी और गर्व का माहौल है।

डॉ. शांभवी सिंह ने अपने शोध में ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) के उपचार में प्रयुक्त एंटी-ग्लूकोमा दवाओं पर महत्वपूर्ण और नवाचारपूर्ण अध्ययन किया है। उनका शोध फार्मेसी एवं नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। खास बात यह है कि उनके शोध को भारत सरकार का पेटेंट कार्यालय से मान्यता प्राप्त हुई है, जिससे इसकी वैज्ञानिक विश्वसनीयता और भी मजबूत हुई है।
यह उपलब्धि केवल एक शैक्षणिक डिग्री नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल है। एक छोटे शहर की बेटी ने यह साबित कर दिया कि संकल्प, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर बेटियां विज्ञान और शोध जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी परचम लहरा सकती हैं।
अपनी सफलता पर डॉ. शांभवी सिंह ने कहा,
“यह उपलब्धि मेरे माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के निरंतर सहयोग का परिणाम है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कोई भी सपना दूर नहीं रहता।”
डॉ. शांभवी सिंह प्रारंभ से ही मेधावी और परिश्रमी छात्रा रही हैं। वे पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रतिभाशाली छात्रा के रूप में जानी जाती रही हैं और बचपन से ही अध्ययन के प्रति समर्पित रही हैं।
उनके पति मुकेश सिंह राणा, वार्ड क्रमांक 23 निवासी, वर्तमान में बालोद जिले में पुलिस विभाग में थाना प्रभारी (एसएचओ) के पद पर पदस्थ हैं। परिवारजनों ने भावुक शब्दों में कहा कि यह सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे जांजगीर-चांपा जिले के लिए प्रेरणादायक क्षण है।
सामाजिक संगठनों और प्रबुद्धजनों ने भी इसे जिले की बेटियों के लिए नई राह खोलने वाला कदम बताया। उनका मानना है कि डॉ. शांभवी सिंह का शोध आने वाले समय में नेत्र रोगों के उपचार में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
जिले के ठाकुर क्षत्रिय समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों ने डॉ. शांभवी सिंह को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि संदेश देती है—
“बेटियां अब सीमाओं में नहीं, संभावनाओं में जी रही हैं।”
डॉ. शांभवी सिंह की यह सफलता नारी शक्ति, शिक्षा और वैज्ञानिक सोच का जीवंत उदाहरण बनकर उभरी है, जिस पर पूरा जांजगीर-चांपा आज गर्व महसूस कर रहा

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Author: Kpn 24

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