
KPN24.com रायपुर 19 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लाने वाला ऐतिहासिक कदम उठाते हुए विधानसभा में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पारित कर दिया गया है। इस कानून के लागू होने के बाद अब लालच, दबाव या भ्रम फैलाकर धर्मांतरण कराने वालों पर सख्त रोक लगेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस विधेयक को सामाजिक संतुलन और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह कानून विशेष रूप से उन लोगों पर नकेल कसने के लिए लाया गया है, जो अशिक्षा, गरीबी और अज्ञानता का फायदा उठाकर लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करते थे।
अब धर्मांतरण के लिए जरूरी होगी पूर्व सूचना
नए प्रावधानों के तहत धर्मांतरण कराने वाले और धर्मांतरण करने वाले—दोनों को अधिकृत अधिकारी के समक्ष पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। सूचना मिलने के एक सप्ताह के भीतर नोटिस जारी किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया को जिला की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा।
एक माह में जांच, तभी मिलेगी अनुमति
प्राधिकृत अधिकारी को एक माह के भीतर पूरे मामले की गहन जांच करनी होगी। जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि धर्मांतरण में कहीं लोभ, प्रलोभन, भय या दबाव तो शामिल नहीं है। सभी पहलुओं की पुष्टि के बाद ही अनुमति दी जाएगी।
बिना अनुमति धर्मांतरण अब असंभव
विधेयक के लागू होते ही बिना अनुमति या किसी भी प्रकार के प्रलोभन, दबाव या भ्रम के आधार पर धर्मांतरण करना अब पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे समाज में पारदर्शिता और विश्वास का वातावरण मजबूत होगा।










