
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बड़ा फैसला
मंत्रिपरिषद् की मंजूरी के बाद लागू हुए नए नियम, खनन माफियाओं में हड़कंप
KPN24.com रायपुर, 24 जून 2026
छत्तीसगढ़ में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण करने वालों के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख के तहत राज्य सरकार ने गौण खनिज नियमों में व्यापक संशोधन कर अवैध खनन माफियाओं पर शिकंजा कस दिया है।
मंत्रिपरिषद् की मंजूरी के बाद लागू हुए नए नियमों को खनन क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है।
अब नहीं चलेगी अवैध खनन की मनमानी
नए नियमों के तहत अवैध उत्खनन और परिवहन पर लगने वाला जुर्माना कई गुना बढ़ा दिया गया है। अब किसी भी मामले में समझौता राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी, जबकि अवैध परिवहन पर प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से प्रशमन शुल्क वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से देना होगा।
वाहन छुड़ाना भी हुआ मुश्किल
अवैध खनन में जब्त वाहन, मशीन और उपकरणों की सुपुर्दगी अब आसान नहीं होगी। वाहन की श्रेणी के अनुसार 50 हजार से 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि न्यायालय में जमा करने के बाद ही वाहन छोड़ा जा सकेगा।
विकास कार्यों को भी मिलेगा लाभ
सरकार ने शासकीय निर्माण कार्यों के लिए उत्खनन क्षेत्र की सीमा 1 हेक्टेयर से बढ़ाकर 2 हेक्टेयर कर दी है। साथ ही अनुज्ञापत्र की अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी गई है, जिससे विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।
खनिज अन्वेषण को मिलेगा नया आधार
राज्य में छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेषण न्यास-2025 की स्थापना की गई है। गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी का 2 प्रतिशत इस न्यास में जमा होगा, जिससे प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की अतिरिक्त राशि उपलब्ध होगी।
राजस्व बढ़ेगा, पारदर्शिता आएगी
नए नियमों के तहत रॉयल्टी, डीएमएफ, पर्यावरण उपकर और अन्य शुल्कों की कटौती की व्यवस्था को एक समान बनाया गया है। इससे अवैध स्रोतों से खनिज उपयोग पर रोक लगेगी और शासन के राजस्व में वृद्धि होगी।
30 साल बाद डेड रेंट में बढ़ोतरी
करीब तीन दशक बाद खदानों के अनिवार्य भाटक (डेड रेंट) की दरों में वृद्धि की गई है। सरकार का मानना है कि इससे केवल गंभीर पट्टाधारी ही खदानों का संचालन करेंगे और निष्क्रिय खदानें पुनः नीलामी के लिए उपलब्ध हो सकेंगी।
जीरो टॉलरेंस का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल को अवैध खनन के खिलाफ सरकार की “जीरो टॉलरेंस नीति” का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। नए नियमों से न केवल अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगेगा, बल्कि राजस्व वृद्धि, पारदर्शिता और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी।










