
मनीष विद्यार्थी सेंधवा मध्यप्रदेश
भजनों और गरबा की धुन पर झूमे श्रद्धालु, जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत; कथावाचक जगद्गुरु संत गोपेश्वरदेव महाराज ने दिया धर्म, धैर्य और भक्ति का संदेश
KPN24.com सेंधवा 01 अगस्त 2026
सेंधवा नगर में धर्म और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब मंडी शेड में श्री गौरीशंकर श्री शिवमहापुराण कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिवस श्री सत्यनारायण मंदिर से गाजे-बाजे और भक्ति की धुनों के बीच भव्य शोभायात्रा एवं कलशयात्रा निकाली गई। श्रद्धालु भजनों और गरबा की धुन पर झूमते हुए कथा स्थल तक पहुंचे।
शोभायात्रा श्री सत्यनारायण मंदिर से प्रारंभ होकर श्याम बाजार, राम बाजार और किला परिसर होते हुए मंडी शेड स्थित कथा स्थल पहुंची। श्रद्धालु सिर पर श्री शिवमहापुराण की प्रति लेकर भक्ति भाव के साथ यात्रा में शामिल हुए। विशेष रथ पर कथावाचक जगद्गुरु संत गोपेश्वरदेव महाराज विराजमान रहे।
शोभायात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और समाजजनों ने पुष्पवर्षा एवं पुष्पहारों से स्वागत किया। मंदिर परिसर में अग्रवाल समाज ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। वहीं श्याम बाजार में अनेक परिवारों ने शोभायात्रा का स्वागत किया, जबकि राम बाजार में पालीवाल समाज द्वारा पुष्पवर्षा कर भव्य अभिनंदन किया गया। इससे पूरे नगर का वातावरण शिवमय और भक्तिमय हो उठा।
शिवभक्ति से महापापों का भी होता है नाश : संत गोपेश्वरदेव महाराज
कथा के दौरान कथावाचक जगद्गुरु संत गोपेश्वरदेव महाराज ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जो श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति भाव से श्री शिवमहापुराण का श्रवण करता है, भगवान शिव उसके जीवन का कल्याण करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव अत्यंत दयालु हैं और उनकी सच्ची भक्ति से महापापों का भी नाश हो जाता है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव को छल-कपट और कपटपूर्ण आचरण पसंद नहीं है। उन्हें निर्मल और पवित्र मन प्रिय है। सच्चे मन से की गई भगवान की भक्ति मनुष्य के अंत:करण को निर्मल बनाती है और जीवन को धर्म एवं सदाचार के मार्ग पर ले जाती है।
विपरीत परिस्थितियों में होती है धैर्य और सच्चे रिश्तों की परीक्षा
कथा वाचक ने रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई “धीरज धरम मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी” का भावार्थ बताते हुए कहा कि धैर्य, धर्म, मित्र और नारी—इन चारों की वास्तविक परीक्षा विपत्ति और संकट के समय होती है।
उन्होंने कहा कि जीवन में विपरीत परिस्थितियां आएं तो व्यक्ति को धैर्य नहीं खोना चाहिए। मित्र की पहचान भी अच्छे समय में नहीं, बल्कि बुरे समय में होती है। संकट की घड़ी में जो साथ खड़ा रहे, वही सच्चा मित्र है।
सुख-शांति के लिए धर्म का मार्ग अपनाना जरूरी
संत गोपेश्वरदेव महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति धर्म का त्याग करता है, वह अपने जीवन के लिए स्वयं संकट खड़ा करता है। यदि मनुष्य जीवन में सुख, शांति और संतोष चाहता है तो उसे धर्म का आश्रय लेना चाहिए। धर्म उस समय भी प्राणी की रक्षा करता है, जब कोई अन्य उसकी सहायता के लिए आगे नहीं आता।
उन्होंने कहा कि सभी पुराण और शास्त्र मनुष्य को पाप से दूर रहने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, लेकिन इसके बावजूद मनुष्य मोह-माया में पड़कर पाप कर्म करता रहता है। ऐसे में श्री शिवमहापुराण का श्रवण और अध्ययन जीवन में धर्म का जागरण करता है तथा व्यक्ति को सदाचार और आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित करता है।
श्री शिवमहापुराण कथा के शुभारंभ अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। कथा स्थल पर देर तक भक्ति और आस्था का वातावरण बना रहा।










