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विश्व आदिवासी दिवस पर झोपाली में गूंजे समाज के सवाल, जल-जंगल-जमीन से लेकर शिक्षा और महिला सुरक्षा तक उठे मुद्दे

मनीष विद्यार्थी सेंधवा मध्यप्रदेश 

विधायक मोंटू सोलंकी बोले—“सड़क से लेकर सदन तक हर संघर्ष में समाज के साथ खड़े हैं”; राहुल सोलंकी ने सामाजिक कुरीतियों और महिला सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल

KPN24.com सेंधवा 08 अगस्त 2026

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर ग्राम झोपाली में आयोजित साप्ताहिक कार्यक्रम में आदिवासी समाज से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को लेकर जमकर मंथन हुआ। कार्यक्रम में जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा, शिक्षा व्यवस्था, महिला सुरक्षा, सामाजिक कुरीतियों, युवाओं के भविष्य और आदिवासी अधिकारों जैसे विषय प्रमुखता से उठे। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने समाज के हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात बेबाकी से रखी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेंधवा विधायक एवं जयस जिलाध्यक्ष मोंटू सोलंकी ने कहा कि समाज के अधिकारों और हितों की लड़ाई में वे मजबूती के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, “सड़क से लेकर सदन तक हम हर संघर्ष में आपके साथ मुस्तैदी से खड़े हैं।”
शिक्षा व्यवस्था पर विधायक ने उठाए सवाल
मोंटू सोलंकी ने आदिवासी क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से आदिवासी क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने तथा बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग की।
दहेज प्रथा और बाल विवाह को लेकर राहुल सोलंकी ने किया आगाह
मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद युवा प्रभाग, बड़वानी के जिलाध्यक्ष एवं जयस सेंधवा ब्लॉक अध्यक्ष राहुल सोलंकी ने महिलाओं से जुड़े मुद्दों और सामाजिक कुरीतियों पर खुलकर अपनी बात रखी।
उन्होंने विवाह के नाम पर दहेज की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि समाज में शादी-ब्याह को लेकर दहेज को कथित रूप से एक तरह के लेन-देन का माध्यम बनाया जा रहा है। उन्होंने नाबालिग अवस्था में विवाह के मामलों में उत्पन्न होने वाली कानूनी और सामाजिक जटिलताओं का उल्लेख करते हुए समाज से अपील की कि बेटा-बेटी का विवाह कानूनी उम्र पूरी होने के बाद ही किया जाए।
एकलव्य विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा उठा
राहुल सोलंकी ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आदिवासी छात्राओं की सुरक्षा, विद्यालयों की निगरानी व्यवस्था और कथित यौन शोषण के मामलों में प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की बेटियों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए और ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
राजपुर मंडी में महिला श्रमिकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा
कार्यक्रम में राजपुर मंडी से जुड़े श्रमिकों और विशेषकर आदिवासी युवतियों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। राहुल सोलंकी ने मंडी में मजदूरी के नाम पर कथित शोषण की शिकायतों पर प्रशासन से गंभीरता से संज्ञान लेने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी महिलाओं या युवतियों के साथ शोषण हो रहा है तो प्रशासन को तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
“विकास के नाम पर जल-जंगल-जमीन से बेदखली स्वीकार नहीं”
कार्यक्रम में गेंदराम दादा और राजेश कनौजे ने आदिवासी समाज की मूल पहचान और अधिकारों से जुड़े विषयों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया में आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने जल, जंगल और जमीन को आदिवासी समाज की पहचान बताते हुए इनके संरक्षण और अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया।
युवाओं के मुद्दों का समर्थन
झोपाली निवासी सुनील पटेल ने युवाओं द्वारा उठाए गए सामाजिक मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए युवाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई।
सैकड़ों ग्रामीण और कार्यकर्ता रहे मौजूद
कार्यक्रम का संचालन ग्राम पटेल संजय, सुनील पटेल एवं जयस अध्यक्ष झोपाली लालू अजनारे ने किया। कार्यक्रम में सायमल सेनानी, करम सोलंकी, पोरलाल खरते, सुखलाल परमान, राजेश कनौजे, गेंदराम दादा, विजय कुमार सोलंकी (एनएसयूआई प्रदेश सचिव), देव जमारे, देवा जाधव, प्रकाश ब्राह्मे, अमरदीप चौहान सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर बंटी पटेल ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया।
विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन केवल उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के अधिकारों, शिक्षा, महिला सुरक्षा और जल-जंगल-जमीन जैसे मुद्दों पर खुली चर्चा का मंच बना। कार्यक्रम में उठे सवालों ने प्रशासन और सरकार के समक्ष आदिवासी समाज की अपेक्षाओं और चिंताओं को मजबूती से सामने रखा।

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Author: Kpn 24

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