
Kpn24.com रायपुर 31 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ में बिजली सप्लाई, मेंटेनेंस और शिकायतों के त्वरित निपटारे की सेवाओं को हाईटेक और असरदार बनाने के लिए शुरू की गई ‘ओपन टेंडर’ प्रक्रिया पर घमासान शुरू हो गया है। एक तरफ जहां पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) सेवाओं में सुधार का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ पावर कंपनी वाहन मालिक कल्याण संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने 3 नवंबर से सेवाओं को ठप करने और 7 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का अल्टीमेटम दे दिया है।
इस हड़ताल से प्रदेश भर में गहराने वाले संभावित बिजली संकट को देखते हुए पावर कंपनी प्रबंधन हरकत में आ गया है। कंपनी ने टकराव टालने के लिए 2 नवंबर 2026 को दोपहर 3:00 बजे रायपुर स्थित मुख्यालय में वाहन संघ के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।
क्या है पूरा विवाद और संघ की चेतावनी?
पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने मेंटेनेंस और टीएमसी/एफओसी (TMC/FOC) सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर करने के उद्देश्य से नई ओपन टेंडर प्रक्रिया निकाली है। लेकिन वाहन मालिक कल्याण संघ इस नई प्रक्रिया का विरोध कर रहा है। संघ की मांग है कि स्थानीय स्तर पर कार्यरत वाहन मालिकों और ठेकेदारों की समस्याओं का समाधान किया जाए।
संघ ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो:
3 नवंबर: विद्युत मेंटेनेंस और एफओसी सेवाएं बंद की जाएंगी।
7 नवंबर से: अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
कंपनी प्रबंधन का बड़ा भरोसा: ‘न किसी का रोजगार जाएगा, न अनदेखी होगी’
बिजली संकट की आहट के बीच कंपनी प्रबंधन ने कड़ा रुख अपनाने के बजाय संवाद का रास्ता चुना है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता हित और निर्बाध बिजली आपूर्ति राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता है।
कर्मचारियों और वाहन मालिकों के हित में कंपनी ने रखे 3 मुख्य बिंदु:
रोजगार सुरक्षा का प्रावधान: नई निविदा पाने वाली एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे कि वह वर्तमान में कार्यरत वाहनों और तकनीकी मानव संसाधन (कर्मचारियों) को नियमानुसार काम पर बनाए रखने के लिए प्रेरित करे।
ट्रेनिंग का विशेष प्रावधान: निविदा में वर्तमान कर्मियों की कार्यकुशलता और सुरक्षा के लिए ट्रेनिंग का विशेष प्रावधान रखा गया है, ताकि किसी भी कर्मचारी का हित प्रभावित न हो।
स्थानीय ठेकेदारों का संरक्षण: प्रबंधन का उद्देश्य किसी भी स्थानीय वाहन मालिक, छोटे ठेकेदार या कर्मचारी के हितों की अनदेखी करना नहीं है।
आगे क्या?
टीएमसी/एफओसी और आपातकालीन सुधार कार्य सीधे तौर पर आम जनता के घरों की बिजली से जुड़े हैं। ऐसे में यदि यह हड़ताल होती है तो प्रदेश भर में बिजली गुल होने पर हाहाकार मच सकता है। कंपनी को उम्मीद है कि 2 नवंबर की बैठक में संघ के पदाधिकारी सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ शामिल होंगे और बातचीत से समाधान निकाल लिया जाएगा।










