
KPN24.com कोरबा/पाली 10 जुलाई 2026
कोरबा जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत स्थित शासकीय हाई स्कूल आमगांव में मानदेय शिक्षक की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। चयन समिति द्वारा नियुक्त किए गए शिक्षक को अचानक हटाकर दूसरे अभ्यर्थी की नियुक्ति किए जाने से विद्यालय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में विद्यालय के प्राचार्य पर मनमानी करने और चयन समिति के निर्णय की अनदेखी करने के आरोप लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, खराबहार निवासी इंद्रजीत सिंह कंवर की नियुक्ति 1 जुलाई को मानदेय शिक्षक के रूप में की गई थी। नियुक्ति से पूर्व 30 जून को उनके दस्तावेजों का सत्यापन चयन समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विद्यालय के प्राचार्य एल.के. डहरिया तथा अन्य सदस्यों की उपस्थिति में किया गया था। नियुक्ति के बाद इंद्रजीत ने विद्यालय में कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों को हिंदी विषय का अध्यापन भी प्रारंभ कर दिया था।
इंद्रजीत का आरोप है कि 8 जुलाई को जब वह नियमित रूप से विद्यालय पहुंचे तो प्राचार्य ने उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया कि अब उनकी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है और उनकी जगह नेहा कुर्रे को नियुक्त कर दिया गया है। उनका कहना है कि जब चयन समिति ने मेरिट के आधार पर उनका चयन किया था, तो बिना किसी लिखित सूचना या कारण बताए उन्हें कैसे हटाया जा सकता है। आरोप है कि इस पर प्राचार्य ने कहा कि “जिसे चाहूं, उसे नियुक्त कर सकता हूं।”
इंद्रजीत का कहना है कि उन्होंने मानदेय शिक्षक बनने के बाद अपनी निजी कंपनी की नौकरी छोड़ दी थी। अब अचानक सेवा समाप्त होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और वे मानसिक रूप से भी प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।
वहीं, विद्यालय के प्राचार्य एल.के. डहरिया का कहना है कि नेहा कुर्रे पूर्व में विद्यालय में अध्यापन कर चुकी हैं, इसलिए उन्हें पुनः नियुक्त किया गया है। हालांकि आरोप है कि नेहा के अंक इंद्रजीत सिंह कंवर से कम हैं।
इधर, जनभागीदारी शिक्षा समिति के अध्यक्ष पंकज ध्रुवा ने स्पष्ट किया कि समिति ने इंद्रजीत सिंह कंवर का चयन उनके बेहतर अंकों के आधार पर किया था और चयन प्रक्रिया के दौरान प्राचार्य स्वयं उपस्थित थे। समिति की सहमति से हिंदी विषय के लिए उनका चयन किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राचार्य ने समिति को बिना सूचना दिए इंद्रजीत को हटाकर नेहा कुर्रे की नियुक्ति कर दी, जिसका समिति ने विरोध दर्ज कराया है।
मामले में पाली के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) के. गोभिल ने भी स्वीकार किया कि इंद्रजीत सिंह कंवर का चयन मानदेय शिक्षक के रूप में हुआ था। उनका कहना है कि चयनित अभ्यर्थी को हटाकर किसी अन्य की पुनर्नियुक्ति करना उचित नहीं माना जा सकता।
न्याय की मांग को लेकर इंद्रजीत सिंह कंवर ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री एवं कलेक्टर को शिकायत भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मनमाने आदेश को निरस्त करने तथा उन्हें पुनः सेवा में बहाल करने की मांग की है।
अब यह मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और विद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है।










