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स्वास्थ्य कर्मचारियों का फूटा आक्रोश: पुनरीक्षित वेतनमान से लेकर निजीकरण तक उठे सवाल, शासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

स्वास्थ्य विभाग को निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग से मुक्त रखने की मांग; रिक्त पदों पर सीधी भर्ती और संविदा कर्मचारियों के लिए समान कार्य-समान वेतन की नीति बनाने की मांग
KPN24.com जांजगीर-चांपा 20 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य कर्मचारियों की शासन स्तर पर वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग में बढ़ते निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठाई है। संघ ने शासन को पत्र भेजकर कर्मचारियों की समस्याओं और विभागीय व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की मांग की है।

संघ का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के पुनरीक्षित वेतनमान लागू करने के संबंध में विभाग द्वारा शासन को प्रस्ताव पूर्व में भेजा जा चुका है। इस मांग को लेकर कर्मचारी लंबे समय से संघर्षरत हैं। वर्ष 2023 में स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन भी किया गया था, जिसे शासन की ओर से सकारात्मक कार्रवाई के आश्वासन के बाद स्थगित किया गया। बावजूद इसके अब तक प्रस्ताव पर ठोस पहल नहीं होने से कर्मचारियों में निराशा और आक्रोश बढ़ रहा है।
इन मांगों को लेकर भी उठाई आवाज
संघ ने स्वास्थ्य कर्मचारियों के हित में पदनाम परिवर्तन, रेडियेशन भत्ता, जोखिम भत्ता, स्वास्थ्य संस्थानों में आवास की व्यवस्था, समय पर पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान, संस्थानों में एक पाली की व्यवस्था तथा अन्य विभागीय समस्याओं के निराकरण की मांग की है। इसके अलावा संविदा कर्मचारियों के लिए विभाग के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती में 50 प्रतिशत पद आरक्षित करने और समान कार्य के लिए समान वेतन की स्पष्ट नीति बनाने की मांग भी रखी गई है।
निजीकरण को लेकर कर्मचारियों में बढ़ी चिंता
संघ ने स्वास्थ्य विभाग की प्रयोगशालाओं को एचएलएल कंपनी को सौंपने और अमृत फार्मेसी खोले जाने से जुड़े निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों में स्वास्थ्य विभाग के निजीकरण की आशंका बढ़ रही है। कर्मचारियों को अपने भविष्य और रोजगार की सुरक्षा को लेकर चिंता सता रही है।
संघ का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण होने से स्वास्थ्य सेवाओं के सार्वजनिक स्वरूप पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसके साथ ही कर्मचारियों की नौकरी और भविष्य असुरक्षित होने तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका भी है। संघ ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग को निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग से मुक्त रखा जाना चाहिए।
बाहरी राज्यों के स्वास्थ्यकर्मियों के पंजीयन का मुद्दा भी उठा
संघ ने प्रदेश से बाहर के चिकित्सकों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के लिए छत्तीसगढ़ में पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त किए जाने को लेकर भी चिंता जताई है। संघ का कहना है कि प्रदेश के हजारों स्वास्थ्य कर्मचारियों और अधिकारियों के बच्चे स्वास्थ्य क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त होने से प्रदेश के प्रशिक्षित युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
संघ ने आशंका जताई कि पंजीयन व्यवस्था कमजोर होने से फर्जी डिग्री और डिप्लोमा धारकों के प्रवेश की संभावना बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती और समान वेतन की मांग
संघ ने प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में स्वीकृत सेटअप के अनुसार रिक्त पदों पर तत्काल सीधी भर्ती शुरू करने की मांग की है। संघ के अनुसार स्वास्थ्य संस्थानों में बड़ी संख्या में पद रिक्त होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
इसके साथ ही संविदा, दैनिक वेतनभोगी और जीवनदीप समिति के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों के लिए भी स्पष्ट नीति बनाने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में जीवनदीप समिति के कर्मचारियों को अलग-अलग मानदेय दिया जा रहा है। पूरे प्रदेश में मानदेय में एकरूपता लाकर कर्मचारियों के आर्थिक शोषण को रोकने की दिशा में ठोस नीति बनाई जानी चाहिए।
स्वास्थ्य आयोग के गठन की भी मांग
संघ ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रदेश में स्वास्थ्य आयोग के गठन की मांग भी उठाई है। साथ ही ऐसे संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों, जिनकी सेवाओं की विभाग को निरंतर आवश्यकता है, उनके पदों को नियमित स्वीकृत सेटअप में शामिल करने की मांग की गई है।
संघ की प्रमुख मांगें
पुनरीक्षित वेतनमान के प्रस्ताव पर तत्काल सकारात्मक कार्रवाई।
स्वास्थ्य कर्मचारियों की लंबित मांगों का शीघ्र निराकरण।
स्वास्थ्य विभाग को निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग से मुक्त रखा जाए।
स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत सभी के लिए पंजीयन अनिवार्य किया जाए।
रिक्त पदों पर स्वीकृत सेटअप के अनुसार तत्काल सीधी भर्ती शुरू की जाए।
संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए समान कार्य-समान वेतन की स्पष्ट नीति बने।
जीवनदीप समिति कर्मचारियों के मानदेय में पूरे प्रदेश में एकरूपता लाई जाए।
जरूरतमंद संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के पदों को नियमित सेटअप में स्वीकृत किया जाए।
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए स्वास्थ्य आयोग का गठन किया जाए।
संघ ने शासन से सभी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। वहीं, संगठन ने यह भी उल्लेख किया है कि सामान्य प्रशासन विभाग के आदेशानुसार संगठन द्वारा प्रस्तुत पत्रों का जवाब दिया जाना अनिवार्य है, ऐसे में अब कर्मचारियों को शासन की ओर से ठोस और सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद है।

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Author: Kpn 24

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