
KPN24.com जांजगीर-चांपा 22 जुलाई 2026
मालवाहक वाहनों से लाखों की डीजल चोरी के मामले में करीब 10 महीने से फरार चल रहे आरोपी ड्राइवर को चांपा पुलिस ने पंजाब के अमृतसर से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की लगातार जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंची टीम ने उसे हिरासत में लेकर विधिवत गिरफ्तार किया। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान रंजीत सिंह (55 वर्ष), निवासी ग्राम ढाडे, थाना इस्लामाबाद, जिला अमृतसर, पंजाब के रूप में हुई है। आरोपी के विरुद्ध धारा 303(2) एवं 3(5) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत कार्रवाई की गई है।
दो ट्रकों से 577 लीटर डीजल चोरी, करीब 54 हजार रुपये का था माल
मामले की शुरुआत 3 अक्टूबर 2025 को हुई, जब आशीर्वाद बिल्टकॉन ट्रांसपोर्टिंग कंपनी के मुंशी मोहित सेठी, निवासी बिल्हा ने थाना चांपा में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक कंपनी के दो मालवाहक ट्रक क्रमांक CG-10-BY-9976 और CG-10-BS-9435 को 26 सितंबर 2025 को जयरामनगर से छुरी के लिए रवाना किया गया था।
अगले दिन दोनों ट्रकों की लोकेशन हथनेवरा चौक स्थित एक ढाबे के पास मिली, लेकिन दोनों वाहनों के चालक अपने मोबाइल फोन बंद कर गायब थे। संदेह होने पर 30 सितंबर को जब मौके पर पहुंचकर ट्रकों की जांच की गई तो डीजल टंकियों के ताले टूटे मिले। जांच में दोनों वाहनों से करीब 577 लीटर डीजल, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 54 हजार रुपये थी, चोरी होना पाया गया। इतना ही नहीं, ट्रकों के टायरों की भी अदला-बदली किए जाने की बात सामने आई।
मामले में थाना चांपा में अपराध क्रमांक 451/2025 दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।
10 महीने बाद पंजाब में मिला सुराग, पुलिस टीम ने अमृतसर पहुंचकर दबोचा
विवेचना के दौरान पुलिस को फरार आरोपी रंजीत सिंह के अमृतसर, पंजाब में होने की जानकारी मिली। सूचना की पुष्टि के बाद चांपा पुलिस की टीम पंजाब रवाना हुई और आरोपी को अमृतसर से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मामले में शामिल दूसरे आरोपी राजू सिंह (26 वर्ष), निवासी चांविंदा देवी, थाना मंजिठा, जिला अमृतसर (पंजाब) की मृत्यु हो चुकी है।
इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक अशोक वैष्णव, सहायक उपनिरीक्षक बाबूलाल दिवाकर एवं आरक्षक प्रकाश द्विवेदी की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही।










