"हर खबर, आपकी नज़र"

kpn 24

बारिश की हर बूंद सहेजने में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल, ‘जल संचय जन भागीदारी’ के तीसरे चरण में हासिल किया पहला स्थान

Kpn24.com नई दिल्ली 02 सितंबर 2026

बारिश की हर बूंद को सहेजने और भू-जल स्तर को मजबूत करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने देश में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण (जेएसजेबी 3.0) में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इतना ही नहीं, प्रदेश के सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जिले देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने ‘कैच द रेन’ सत्र में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण की जानकारी दी।
जल संरक्षण को बनाया जनअभियान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर इसे जनअभियान का रूप दिया है। उन्होंने कहा कि किसान के लिए पानी केवल संसाधन नहीं, बल्कि फसल, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है।
किसानों का ‘5 प्रतिशत मॉडल’ बना मिसाल
मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। इसके तहत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा स्वेच्छा से जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण के लिए उपलब्ध करा रहे हैं। खेत में ही बारिश का पानी रोकने से उसके जमीन में समाहित होने और सिंचाई के लिए जल उपलब्धता बढ़ने की संभावना है।
तीन चरणों में लाखों जल संरचनाएं
‘जल संचय जन भागीदारी’ के तीन चरणों में छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर जल संरचनाएं बनाई और दर्ज की गई हैं।
जेएसजेबी 1.0: 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं
जेएसजेबी 2.0: 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज, इनमें 23 लाख 7 हजार 768 पूर्ण
जेएसजेबी 3.0: 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज, इनमें 77 हजार 719 पूर्ण
इस प्रकार तीनों चरणों में प्रदेश में 28 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पंजीयन हुआ है।
पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या घटी
जल संरक्षण के प्रयासों का असर प्रदेश में दिखाई देने लगा है। पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। वहीं पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।
हर राज्य का हो अपना ‘कैच द रेन प्लान’
मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रीय स्तर पर जल संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक राज्य के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’, जल संरचनाओं की बेहतर मैपिंग तथा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हर तीन महीने में अभियान की समीक्षा का भी सुझाव दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक, नियमित निगरानी और जनभागीदारी के समन्वय से जल संरक्षण को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ का यह मॉडल संदेश देता है कि बारिश की हर बूंद को खेत और गांव में रोकने की सामूहिक पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव बन सकती है।

 

Kpn 24
Author: Kpn 24

Leave a Comment

Read More