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बिना मेंटेनेंस के मिली स्कूल बस तो प्रबंधन की खैर नहीं- एसपी पाटीदार

मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर

KPN24:- इस माह के दूसरे पखवाड़े से स्कूलों के पट खुलना है। ऐेसे में प्रदेश सहित देश में कई शहरों में स्कूली बसों से हुए सडक़ हादसों को लेकर जिला प्रशासन चिंतित है और जिले या शहर में इस तरह का कोई हादसा न हो इसको लेकर एक बैठक का आयोजन बुधवार को किया गया। जिसमें तमाम स्कूल संचालकों को समझाईश दी गई कि स्कूलें खुलने से पहले वाहनों की अच्छे से जांच-पड़ताल करा लें और यातायात के तमाम नियमों का सख्ती से पालन करें ताकि नौनिहालों और विद्यार्थियों को किसी भी तरह की असुविधा न हो और उनके परिजन भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित न हो।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जबलपुर ने स्कूली बच्चों के सुरक्षित आवागमन को लेकर चिंता जताते हुए सभी शैक्षणिक संस्थाओं को गाइडलाइन जारी कर आवश्यक निर्देशों का पालन करने ही हिदायत दी। इसी संदर्भ में बुधवार को एसपी देवेंद्र पाटीदार के निर्देशन में शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय में एक बैठक रखी गई। जिसमें तमाम प्रशासनिक अफसरकर्मी और शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। बैठक में परिवहन विभाग के अधिकारी द्वारा आवश्यक निर्देशों के बारे में बताया गया।
इन नियमों का करना होगा पालन
वाहन की पहचान और पंजीकरण, बस के आगे और पीछे स्कूल बस स्पष्ट अक्षरों में लिखा होना चाहिए। यदि बस किसी विशेष समय में स्कूल सेवा में है तो उस पर ऑन स्कूल ड्युटी लिखा होना चाहिए। बस का पंजीकरण प्रमाणपत्र, बीमा दस्तावेज, और फिटनेस सर्टिफिकेट वैध होना चाहिए। ड्राइवर और स्टॉफ की योग्यता ड्राइवर की न्यूनतम आयु 25 वर्ष हो और उसके पास वैध व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस हो। कम से कम 5 वर्षों का भारी वाहन चलाने का अनुभव आवश्यक है। ड्राइवर और कंडक्टर का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है। सभी स्टॅाफ को बच्चों के साथ व्यवहार संबंधी प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
ये होना चाहिए सुरक्षा के लिए डिवाईस
सुरक्षा सुविधाओं के लिए बस में जीपीएस ट्रैकर, सीसीटीवी कैमरा और संपर्क नंबर होना चाहिए। प्रत्येक बस में एक महिला अटेंडेंट सहायक अनिवार्य होनी चाहिए, विशेषकर प्राइमरी स्तर के लिए। बस में एक प्राथमिक चिकित्सा किट होना अनिवार्य है। बस के अंदर अग्रि शमन यंत्र होना चाहिए। बस में इमरजेंसी खिडक़ी होना, बैठक व्यवस्था और सीट बेल्ट, बच्चों के अनुसार सीटों की संख्या तय होनी चाहिए। ओवरलोडिंग प्रतिबंधित है। सीटें आरामदायक और सुरक्षित होनी चाहिए। प्राथमिक स्तर की बसों में सीट बेल्ट की व्यवस्था की अनुशंसा की जाती है। चालक की गति और व्यवहार निगरानी गति सीमा का पालन अनिवार्य है।

सामान्यत 40 किमी घंटा से अधिक नहीं।

मोबाइल फोन का उपयोग व तेज गति पर रोक होनी चाहिए। छात्रों की बोर्डिंग और ड्रॉपिंग व्यवस्था बस स्टॉप पर नियंत्रित और सुरक्षित बोर्डिंग और लाइटिंग व्यवस्था हो। बच्चे तभी छोड़े जाएं जब वहां उनका अभिभावक उपस्थित हो। ड्राइवर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी बच्चे सुरक्षित रूप से बैठ जाएं, तब ही बस चलें। स्कूल प्रबंधन को बस की नियमित मेंटेनेंस और फिटनेस टेस्टिंग का ध्यान रखना होगा। टायर, ब्रेक, लाइट्स, वाइपर आदि का समय-समय पर निरीक्षण हो।
ये थे।
बैठक में एडीएम वीरसिंह चौहान, थाना प्रभारी कोतवाली सीताराम सोलंकी, निरीक्षक हरिसिंह रावत, सहायक उप निरीक्षक संदीप कैथवास, परिवहन विभाग के अधिकारी एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं सभी स्कूलों के संचालक उपस्थित रहे। यह बैठक विद्यार्थियों की सुरक्षा के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के लिए की गई।

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Author: Kpn 24

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