
KPN24 :- हर राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में उस प्रदेश के पर्यटन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है इसी लिए हर राज्य अपने यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं, इसी बात का ध्यान रखते हुए राज्य व केंद्र सरकार की बिलासपुर जिले में पर्यटन विकास की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है।
केंद्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू के नेतृत्व में ATR (अचानकमार टाइगर रिजर्व) से अमरकंटक तक नया टूरिस्ट सर्किट विकसित किया जाएगा. इस परियोजना में एनटीपीसी, एसईसीएल, अडानी फाउंडेशन समेत अन्य बड़ी कंपनियों का सहयोग लिया जाएगा. इनकी मदद से बिलासपुर, रतनपुर, खूंटाघाट, खुड़िया जलाशय, अचानकमार टाइगर रिजर्व और अमरकंटक के पर्यटन स्थलों को आकर्षक और सुविधाजनक बनाया जाएगा.
मंत्री साहू ने सोमवार को जिला अधिकारियों और कंपनियों के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक लेकर विस्तृत कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस काम के लिए निजी कंसल्टेंट की मदद से एक महीने के भीतर डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जाएगी. इसके बाद अलग-अलग कंपनियों को विकास कार्य की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
बैठक में विधायक धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला, दिलीप लहरिया, अटल श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, कलेक्टर संजय अग्रवाल और सीईओ संदीप अग्रवाल भी मौजूद रहे. मंत्री साहू ने कहा कि बिलासपुर छत्तीसगढ़ के मध्य में होने के कारण बड़ी संख्या में लोग यहां से गुजरते हैं. पर्यटक यहां रुककर घूमना चाहते हैं, लेकिन सुविधाओं और प्रचार की कमी के कारण इन स्थलों की जानकारी और पहुंच सीमित है.
उन्होंने एनटीपीसी, एसईसीएल और अडानी फाउंडेशन से पर्यटन विकास में सक्रिय सहयोग की अपील की. कंपनियों ने इस पहल में भागीदारी के लिए सहमति जताई है. परियोजना में केंद्र सरकार की प्रसाद योजना का भी लाभ लिया जाएगा.
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि डीपीआर बनने के बाद कंपनियों को जिम्मेदारी देकर तेजी से काम शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आने वाले पर्यटकों के लिए दो-तीन दिन ठहरने योग्य इंतजाम किए जाएंगे. अचानकमार टाइगर रिजर्व करीब 1 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला है, जहां खुड़िया, केंवची और शिवतराई से प्रवेश की व्यवस्था होगी.
मंत्री साहू ने कहा कि जिले में बैगा बहुल इलाकों में होम स्टे की भी योजना बनाई जा रही है. ट्राइबल संस्कृति और ट्री विलेज का कॉन्सेप्ट यहां के पर्यटन को खास पहचान देगा. इस टूरिस्ट सर्किट के विकास से सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.










