
KPN24:- छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम, 2020 और उसके तहत बनाए गए नियमों को पूरी तरह संवैधानिक करार दिया है। जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने इस मामले में निजी स्कूलों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि राज्य सरकार को निजी स्कूलों की फीस तय करने के लिए कानून बनाने का पूरा अधिकार है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2020 में अधिनियम लागू किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन और बिलासपुर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने इसे 2021 में हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय की स्वतंत्रता) का उल्लंघन बताया और इसे असंवैधानिक ठहराने की मांग की थी। उनका कहना था कि यह अधिनियम गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप करता है और फीस तय करने का अधिकार केवल स्कूल प्रबंधन के पास होना चाहिए।
वहीं, राज्य सरकार ने अपने पक्ष में यह तर्क दिया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में शामिल है और सरकार का उद्देश्य स्कूलों में फीस निर्धारण को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाना है। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि निजी स्कूल भी इस प्रकार के नियमन से मुक्त नहीं हो सकते।
कोर्ट ने कहा – असुविधा के आधार पर अधिनियम को अवैध नहीं ठहराया जा सकता
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता संघ नागरिक नहीं हैं, इसलिए वे संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत संवैधानिक अधिकारों का दावा नहीं कर सकते। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिनियम का उद्देश्य केवल फीस में पारदर्शिता लाना है और किसी को असुविधा हो रही है, यह कहकर किसी कानून को असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता।
इस निर्णय के बाद राज्य सरकार को निजी स्कूलों की फीस तय करने और उसे नियंत्रित करने का कानूनी आधार मिल गया है। वहीं, निजी स्कूलों के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है।










