
KPN24:- जांजगीर-चांपा जिले की जनपद पंचायत पामगढ़ के ग्राम मेऊ में रहने वाली बुजुर्ग महिला श्रीमती लछन बाई की कहानी उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते। कभी एक जर्जर कच्ची झोपड़ी में अकेले जीवन गुजारने वाली लछन बाई, आज प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की सहायता से सम्मानपूर्वक अपना जीवन जी रही हैं।
पति-पत्नी, बेटा-बेटी, परिवार या किसी भी सहारे के बिना लछन बाई का जीवन एक संघर्ष था। टपकती छत, बरसात में गलती दीवारें और हाड़ कंपा देने वाली ठंडी रातें उनकी रोजमर्रा की सच्चाई थीं। मगर उनके जीवन की दिशा उस दिन बदल गई जब प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उन्हें ₹1.20 लाख की सहायता राशि और मनरेगा से ₹21,600 की मजदूरी स्वीकृत हुई।
बुजुर्ग होने के बावजूद लछन बाई ने खुद अपने घर को खड़ा करने में मेहनत की। उन्होंने ईंटें उठाईं, मिट्टी ढोई और हर ईंट में अपने आत्मबल की कहानी जोड़ दी। आज जब वह कहती हैं, “ये मेरा घर है, मेरी मेहनत से बना है”, तो यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का उद्घोष बन जाता है।
लछन बाई कहती हैं, “पहले जब बारिश आती थी, तो दीवारें गल जाती थीं, ठंडी में ठिठुरना पड़ता था, डर लगा रहता था कि दीवार कहीं गिर न जाए। अब बारिश आए या सर्दी, मेरा घर मजबूत है, सुरक्षित है। अब यह सिर्फ छत नहीं, मेरा सपना, मेरा सम्मान है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा, “पीएम आवास योजना ने मेरा जीवन बदल दिया। अब मेरे पास खुद का पक्का मकान है, जो मेरे नाम से है। यह घर सिर्फ सरकारी योजना का हिस्सा नहीं, मेरी मेहनत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।”
लछन बाई की यह कहानी केवल एक महिला की नहीं, बल्कि उस नई सोच की है जहाँ सरकारी योजनाएँ जरूरतमंदों तक पहुँचती हैं और वे आत्मसम्मान के साथ एक नई शुरुआत करते हैं।










