
KPN24:- सक्ती जिले में मालखरौदा के गौरव, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय श्री वेदराम जी की पुण्यतिथि के अवसर पर आज शासकीय वेदराम महाविद्यालय में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा और सम्मान के साथ किया गया। स्वर्गीय वेदराम जी के सम्मान में स्थापित इस महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में प्राचार्य, प्राध्यापकगण, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी. डी. जांगडे ने अपने उद्बोधन में स्वर्गीय वेदराम जी के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि वे मालखरौदा की माटी के ऐसे सपूत थे जिन्होंने न सिर्फ देश की आज़ादी के लिए संघर्ष किया, बल्कि आज़ादी के बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस शासनकाल के दौरान सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि स्व. वेदराम जी का जीवन निस्वार्थ सेवा, दृढ़ संकल्प और सच्ची देशभक्ति का प्रतीक है, जो आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।
प्राचार्य डॉ. जांगडे ने यह भी कहा कि यह महाविद्यालय उनके नाम पर स्थापित होने के कारण सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वे उनके आदर्शों को आत्मसात करें और उनके दिखाए मार्ग पर चलें।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित समस्त प्राध्यापकगण, कर्मचारी और छात्रों ने स्व. वेदराम जी को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने उनके साहस, नेतृत्व और जनसेवा के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यों से समाज के उत्थान में अहम भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. कौशल्या मैत्री ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से सी. आर. कोसले, श्रीमती यू. एन. जायसवाल, वासुदेव एक्क, गंगा राम जोशी, राजकुमार कुर्रे, रामरतन खूंटे लेखराम कोसरिया, डॉ. योगेश्वर बघेल, श्रीमती मथुरा महिलाएंगे, डॉ. राजेश ग, नरेश कुमार राठौर, वासुरमन घृतलहरे, मनीष बंजारे, लखन भास्कर, श्रीमती राजेश्वरी खूंटे, और सुश्री वेदकुमारी साहू सहित अनेक गणमान्य शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
कार्यक्रम का समापन स्व. वेदराम जी की देशभक्ति और समाज सेवा की भावना को आत्मसात करने के संकल्प के साथ किया गया। मालखरौदा की जनता और महाविद्यालय परिवार ने इस अवसर पर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की और उनके सिद्धांतों पर चलने का आह्वान किया।










