
KPN24:- जबलपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई में स्पष्ट किया कि उम्र किसी की प्रतिभा या शिक्षा पाने के अधिकार का पैमाना नहीं हो सकती। अदालत ने कहा कि केवल आयु सीमा का हवाला देकर किसी भी छात्र के शिक्षा के अधिकार को बाधित करना न्यायोचित नहीं है।
यह मामला जबलपुर निवासी 11 वर्षीय विलक्षण छात्र आरव सिंह पटेल से जुड़ा है। आरव ने सेंट कान्वेंट स्कूल, रांझी से कक्षा आठ तक की पढ़ाई पूरी कर ली है और अब वह कक्षा नौ में प्रवेश चाहता है। लेकिन सीबीएसई के नियमों के अनुसार न्यूनतम आयु 14 वर्ष होने से उसे एडमिशन नहीं मिल पा रहा था।
आरव के माता-पिता ने बेटे की असाधारण प्रतिभा को देखते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि आरव अपनी उम्र से कहीं अधिक समझ और अकादमिक क्षमता रखता है, बावजूद इसके उसे आयु सीमा के कारण कक्षा 9 में प्रवेश नहीं मिल रहा।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि आयु सीमा शिक्षा पाने के अधिकार पर अंकुश नहीं लगा सकती। अदालत ने सीबीएसई चेयरमैन को निर्देशित किया कि आरव का आईक्यू टेस्ट कराया जाए। इसके लिए तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा और उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही कक्षा 9 में प्रवेश को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने साथ ही स्कूल प्रिंसिपल और सीबीएसई बोर्ड के डायरेक्टर को निर्देश दिए कि वे आरव का इंटरव्यू लेकर उसकी क्षमताओं का मूल्यांकन करें और इसकी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।
यह आदेश न केवल आरव के लिए बल्कि उन तमाम बच्चों के लिए मिसाल बन सकता है, जिनकी असाधारण प्रतिभा को आयु सीमा जैसी शर्तों के कारण दबा दिया जाता है।










