
KPN24:- मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के केला किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। उत्तर भारत के कई राज्यों—दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर—में आई बाढ़ के कारण यहां से केले की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। सप्लाई रुकने से किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
केला उत्पादक किसानों का कहना है कि इस समय खेतों में तैयार फसल खड़ी है, लेकिन यदि समय पर कटाई और बिक्री नहीं हुई तो केले पककर सड़ जाएंगे। ऐसे हालात में किसानों को लागत निकालना तो दूर, खेतों से कटाई की मजदूरी तक नहीं निकल पा रही है।
किसानों ने मांगा समर्थन मूल्य
किसानों ने एक बार फिर सरकार से केले का समर्थन मूल्य तय करने की मांग की है। लोनी के किसान भास्कर महाजन और नाचनखेड़ा के किसान हेमंत पाटिल ने कहा कि बिना सरकारी सहयोग के किसानों के लिए यह संकट झेलना मुश्किल हो जाएगा।
22 हजार हेक्टेयर में होती है केले की खेती
जानकारी के अनुसार, बुरहानपुर जिले में 22 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में केले की खेती की जाती है। यहां का केला देशभर के राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी सप्लाई होता है। सामान्य परिस्थितियों में यहां से प्रतिदिन 250 से अधिक ट्रक केले की ढुलाई के लिए निकलते हैं, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलता है।
मंडी को भी नुकसान
कृषि उपज मंडी सचिव भूपेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि बाढ़ की वजह से अब मंडी में केवल 40 से 50 गाड़ियां ही पहुंच रही हैं, जबकि पहले यह संख्या 100 से अधिक रहती थी। इससे मंडी के राजस्व पर भी असर पड़ा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शारदीय नवरात्रि के दौरान गाड़ियों की संख्या फिर से बढ़ सकती है।
किसानों की दोहरी मार
दरअसल, बुरहानपुर और आसपास के क्षेत्रों में पहले प्राकृतिक आपदाओं ने किसानों को नुकसान पहुंचाया था, अब सप्लाई ठप होने से उनकी कमर और टूट गई है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार समय रहते राहत उपाय नहीं करती तो हजारों किसानों और मजदूरों का जीवन संकट में पड़ जाएगा।










