
KPN24:- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सेरीखेड़ी में आज गुरु श्री तेगबहादुर सिंह जी की 350वीं शहादत शताब्दी के अवसर पर नगर कीर्तन यात्रा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने कहा कि गुरु तेगबहादुर सिंह जी ने धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। यह हमारे लिए सौभाग्य का विषय है कि छत्तीसगढ़ की धरती पर इस ऐतिहासिक कीर्तन यात्रा का स्वागत करने का अवसर प्राप्त हुआ।
मुख्यमंत्री श्री साय ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। उन्होंने पंच प्यारों का सम्मान किया तथा उन्हें पवित्र सिरोपा और कृपाण भेंट की गई।
उन्होंने कहा कि यह नगर कीर्तन यात्रा गुरु तेगबहादुर जी की 350वीं शहादत शताब्दी पर असम के गुरुद्वारा धुबरी साहिब से प्रारंभ होकर देश के विभिन्न हिस्सों से होते हुए लगभग 10 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर छत्तीसगढ़ पहुँची है। यह प्रदेश के लिए गर्व और सौभाग्य का क्षण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु तेगबहादुर जी ने अपने धर्म की रक्षा के लिए मुगलों के सामने झुकने के बजाय शहादत को चुना। आज भी दिल्ली के गुरुद्वारा शीशगंज साहिब उनकी अमर शहादत का प्रतीक है। उन्होंने सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों के बलिदान को भी याद किया और कहा कि उनकी शहादत अद्वितीय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हर वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने का निर्णय इसी शौर्य की स्मृति है। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी वीर बाल दिवस को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है।
इस अवसर पर विधायक सुनील सोनी, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कांवड़िया, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा सहित गुरुद्वारा कमेटियों के प्रमुख और बड़ी संख्या में सिख धर्मावलंबी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।










