
KPN24:- छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के विकास को नई दिशा देने वाली एक और महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी मिली है। छत्तीसगढ़ शासन ने नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र स्थित कुतुल से महाराष्ट्र सीमा पर स्थित नीलांगुर तक नेशनल हाईवे-130 डी के 21.5 किलोमीटर लंबे हिस्से के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर ली है। लोक निर्माण विभाग मंत्रालय द्वारा प्रमुख अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र रायपुर को न्यूनतम दर देने वाले ठेकेदार के साथ अनुबंध की प्रक्रिया शर्तों सहित पूर्ण करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
इस निर्माण कार्य हेतु कुल तीन खंडों में लगभग 152 करोड़ रुपए की न्यूनतम टेंडर दर प्राप्त हुई है, जिसे शासन ने मंजूरी दे दी है। यह सड़क टू-लेन पेव्ड शोल्डर सहित तैयार की जाएगी, जिससे अबूझमाड़ क्षेत्र में आवागमन और कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि – “नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति को तेज करने के लिए सरकार सतत प्रयासरत है। अबूझमाड़ में सड़कों का विस्तार न केवल आवागमन को सुगम बनाएगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था को भी नई ऊर्जा देगा।”
नेशनल हाईवे 130-डी, जो एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है, की कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। यह मार्ग कोण्डागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुँचता है, जहाँ यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है।
वर्तमान में कोण्डागांव से नारायणपुर तक लगभग 50 किलोमीटर का हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल तक 50 किलोमीटर और कुतुल से नीलांगुर तक 21.5 किलोमीटर सड़क बननी है। इस प्रकार कुल 122 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत आता है।
इस राजमार्ग के बन जाने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा। इसके साथ ही इस क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और सुरक्षा व्यवस्थाओं को नई मजबूती प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि – “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सहयोग से इस नेशनल हाईवे के अबूझमाड़ क्षेत्र वाले हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस और निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई है। यह परियोजना केवल एक सड़क नहीं, बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है।”
यह परियोजना बस्तर के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाएगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित और सुगम यातायात सुविधा उपलब्ध कराते हुए यह हाईवे क्षेत्र के विकास की नई पहचान बनेगा।










