
KPN24:- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में शांति स्थापना की दिशा में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल लगातार सार्थक परिणाम दे रही है। इसी क्रम में आज कांकेर जिले में कुल 21 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया, जो प्रदेश में संचालित “आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” और “नियद नेल्ला नार योजना” की सफलता का सशक्त प्रमाण है।
इस पहल के माध्यम से माओवाद से प्रभावित इलाकों में विश्वास और परिवर्तन की नई बयार बह रही है। अब माओवादी विचारधारा से भ्रमित युवा भी यह समझने लगे हैं कि विकास की राह ही भविष्य का सही विकल्प है, न कि बंदूक की भाषा। राज्य सरकार इन आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास, शिक्षा, प्रशिक्षण और सामाजिक पुनर्स्थापन के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर के लोगों का विश्वास अर्जित किया है। इसी विश्वास का परिणाम है कि माओवादी संगठन लगातार कमजोर हो रहे हैं और बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि बस्तर अंचल में नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और अब यह क्षेत्र शांति, स्थायित्व और विकास की नई दिशा में तेजी से अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य की “डबल इंजन सरकार” का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक देश को पूर्णतः नक्सलमुक्त बनाया जाएगा।










