
KPN24:- कहते हैं, अगर इरादे बुलंद हों तो गांव की मिट्टी भी चमत्कार कर सकती है। इस बात को सच कर दिखाया है जांजगीर-चांपा जिले के छोटे से गांव बहेराडीह के युवा कृषक दीनदयाल यादव ने। भारत सरकार के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) ने उन्हें “जामुन की नई किस्म — राय जाम” का राष्ट्रीय पेटेंट प्रमाणपत्र प्रदान किया है।
यह सफलता केवल दीनदयाल यादव की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के किसानों की मेहनत और नवाचार की पहचान है।
18 साल के लिए मिला पेटेंट — अब ‘राय जाम’ पर उनका रहेगा विशेष अधिकार
भारत सरकार ने 03 अक्टूबर 2025 को दीनदयाल यादव को पंजीकरण क्रमांक 2164 जारी किया है।
अब उन्हें 18 वर्षों तक “राय जाम” पौधा किस्म के उत्पादन, विक्रय, वितरण, आयात-निर्यात का एकमात्र अधिकार प्राप्त है।
इसका नवीनीकरण 02 अक्टूबर 2043 को होगा।
वैज्ञानिक मार्गदर्शन और अथक मेहनत से मिली सफलता
वर्ष 2016 में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के पादप प्रजनन विभाग प्रमुख डॉ. दीपक शर्मा के मार्गदर्शन में
दीनदयाल यादव ने “राय जाम” किस्म के लिए आवेदन किया था।
इसका वैज्ञानिक परीक्षण केंद्रीय फल अनुसंधान केंद्र, लखनऊ के वैज्ञानिकों ने दो चरणों में किया।
सफल परीक्षण के बाद केंद्र सरकार ने इस नवाचार को पेटेंट की मान्यता दी।
पहले भी मिल चुके हैं “गेंदा” और “बेल” पौधों के पेटेंट
यह पहली बार नहीं है जब बहेराडीह के इस युवा किसान ने कमाल किया हो।
इससे पहले दीनदयाल यादव को जंगली पीला गेंदा और बेल पौधों की नई किस्मों पर भी पेटेंट मिल चुका है।
कृषि के क्षेत्र में उनका यह निरंतर प्रयास बताता है कि नवाचार और खेती का संगम ही भविष्य की सच्ची खेती है।
राष्ट्रीय स्तर पर हो चुका है सम्मान — मिला “पादप जिनोम संरक्षक कृषक सम्मान”
भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2017-18 में
दीनदयाल यादव को केंद्रीय कृषि मंत्री के हाथों “पादप जिनोम संरक्षक कृषक सम्मान” प्रदान किया था।
उन्हें ₹1 लाख 50 हजार की राशि और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।
गांव के खेतों से नवाचार की कहानी — किसानों के लिए प्रेरणा बने दीनदयाल
दीनदयाल यादव का मानना है कि “खेती केवल जीवनयापन का साधन नहीं, बल्कि विज्ञान और सम्मान दोनों का संगम है।”
उनकी यह सोच आज हजारों किसानों को प्रेरित कर रही है कि
अगर लगन और प्रयोगशीलता हो, तो गांव का किसान भी पेटेंट धारक वैज्ञानिक किसान बन सकता है।
बहेराडीह की मिट्टी से निकली मिसाल
छत्तीसगढ़ की इस भूमि ने फिर साबित किया है कि यहां का किसान केवल मेहनती नहीं,
बल्कि नवाचार में भी किसी से पीछे नहीं।
दीनदयाल यादव ने अपनी प्रतिभा से यह संदेश दिया है “खेती में शोध हो तो हर खेत एक प्रयोगशाला बन सकता है।”










