
KPN24 :- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने नशे के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। डीडी नगर थाना पुलिस ने गांजे की तस्करी करने वाले एक महिला समेत तीन अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 56 किलो अवैध गांजा और एक किया क्रेस कार जब्त की गई है, जिसकी कुल कीमत लगभग 30 लाख रुपये आंकी जा रही है।
सूचना मिली थी कि सुंदर नगर मैदान के पास एक सफेद कार में भारी मात्रा में नशे का सामान रखा गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुँचकर गाड़ी की जांच की। वाहन मालिक को बुलवाकर जब कार की तलाशी ली गई, तो उसमें तीन बोरियों में भरा गांजा बरामद हुआ।
पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा
पुलिस ने हिरासत में लिए गए तीनों तस्करों — राजू बेरिया और गगन मांझी (निवासी नुआपाड़ा, ओडिशा) तथा लक्ष्मी चौहान (निवासी अमरावती, महाराष्ट्र) — से पूछताछ की।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि जब्त किया गया गांजा ओडिशा से महाराष्ट्र के अमरावती ले जाया जा रहा था।
तस्करों ने बताया कि वे लोकेशन आधारित डिलीवरी सिस्टम के जरिए काम करते हैं — यानी उन्हें केवल गांजा कहाँ से उठाना है और कहाँ छोड़ना है, इसकी जानकारी मिलती है, पर असली सप्लायर कौन है, इसका पता नहीं होता।
महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर सवाल
जांच में यह भी सामने आया कि ये तस्कर महिलाओं को अपने गिरोह में शामिल करके पुलिस को चकमा देने की रणनीति अपनाते हैं। पारिवारिक रूप में यात्रा करने से संदेह कम होता है और अवैध कारोबार आसानी से संचालित किया जा सकता है।
पुलिस के अनुसार, एक महिला तस्कर अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
समाज के लिए यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि अब महिलाएँ भी अपराध के ऐसे नेटवर्क में तेजी से शामिल होती दिख रही हैं। जहाँ पहले नशे और तस्करी के मामलों में पुरुषों की भूमिका हावी थी, वहीं अब महिलाओं की संलिप्तता बढ़ना एक सामाजिक चिंता का विषय बन गया है।
समाज को इस दिशा में जागरूकता और मूल्य आधारित शिक्षण पर गंभीरता से विचार करना होगा, ताकि नशे का यह जाल कमजोर वर्गों और परिवारों को अपनी गिरफ्त में न ले सके।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल, पुलिस ने एनडीपीएस (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। डीडी नगर थाना पुलिस अब इस नेटवर्क के मुख्य सप्लायर और खरीदारों की तलाश में जुटी है।
रायपुर पुलिस की यह कार्रवाई न केवल नशे के कारोबार पर चोट है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि अपराध में महिलाओं की बढ़ती भूमिका समाज के लिए एक नई चुनौती बनकर उभर रही है।










