
KPN24:- खरगोन जिले के मत्स्य विभाग में इन दिनों भ्रष्टाचार, सांठगांठ और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग के सहायक संचालक रमेश मोरे, मत्स्य निरीक्षक जयंतीलाल पाटीदार तथा धार जिले के सहायक संचालक तेजा चौहान पर आरोप है कि उन्होंने मध्यप्रदेश मत्स्य नीति 2008 को दरकिनार करते हुए अपात्र समितियों को जलाशयों का आवंटन कर दिया।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया में भारी रकम के लेनदेन की आशंका है, जिससे विभागीय पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
विवादों में आए जलाशय
सूत्रों के अनुसार, विभागीय अधिकारियों द्वारा नीति की अवहेलना करते हुए जिन पाँच बड़े जलाशयों का आवंटन किया गया, उनमें शामिल हैं —
चंदनपुरा जलाशय – 131.685 हे.
गंगन जलाशय – 112.900 हे.
नवलपुरा जलाशय – 121.355 हे.
अंबकनाला जलाशय – 231.974 हे.
डेहरी क्रमांक-01 जलाशय – 106.500 हे.
इन सभी आवंटनों को लेकर स्थानीय मत्स्य समितियों में आक्रोश व्याप्त है।
पात्रों को दरकिनार, अपात्रों को लाभ
आरोप है कि विभाग ने वास्तविक पात्र समितियों को नजरअंदाज करते हुए अपात्र समितियों को तालाबों का आवंटन किया। नतीजतन, वर्षों से मत्स्य पालन कर जीवनयापन करने वाले गरीब मछुआरे रोज़गार से वंचित हो गए हैं और कई लोग रोजगार की तलाश में अन्य जिलों व राज्यों की ओर पलायन के लिए मजबूर हैं।
समितियों ने की शिकायत
स्थानीय मत्स्य समितियों ने इस पूरे मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री मोहन यादव, आयुक्त इंदौर, और कलेक्टर खरगोन को पत्र भेजा है। पत्र में तीनों अधिकारियों को पद से हटाने और विभागीय जांच की मांग की गई है।
रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप
पात्र समितियों का कहना है कि,
“हम सालों से मत्स्य पालन के क्षेत्र में कार्यरत हैं और हर नीति का पालन करते हैं। लेकिन जब तालाबों का बंटवारा रिश्वत और सिफारिश के आधार पर होगा, तो आम मछुआरे कहाँ जाएं?”










