
पहले भी रुपए माँगने और शराब ठेकों पर खड़ी रहने को लेकर विवादित
वेंडर की मनमानी और अफसरों की कथित मिलीभगत से सरकारी योजना बदनाम
मनीष विद्यार्थी खरगोन।
KPN24:- मध्यप्रदेश के खरगोन में गरीब, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की प्रसूताओं को सुरक्षित व समय पर अस्पताल पहुँचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू की गई जननी एक्सप्रेस सेवा का जिले में दुरुपयोग लगातार सामने आ रहा है। इमरजेंसी सेवा को ठेके पर दिए जाने के बाद वेंडर और मैनेजमेंट की मनमानी के कारण यह एंबुलेंस मरीजों की जगह अब अवैध शराब की सप्लाई करती दिखाई देने लगी है।
सूत्रों के मुताबिक इस तरह की हरकतें जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी के बिना नहीं हो सकतीं। लेकिन हर बार की तरह मामला सार्वजनिक होते ही वेंडर और अधिकारी ड्राइवर को बलि का बकरा बनाकर केवल दिखावे की कार्रवाई कर देते हैं।
तेज रफ्तार एंबुलेंस को पुलिस ने रोका, पायलट फरार
बीती रात चैनपुर थाना क्षेत्र के ठेला–पाडवा चौकी पुलिस ने एक संदिग्ध एंबुलेंस को रोकने की कोशिश की। पुलिस ने सायरन बजाकर इशारा किया, पर चालक तेज गति से वाहन भगाता रहा। कुछ दूरी तक पीछा करने के बाद जैसे ही पुलिस ने वाहन रोका, एंबुलेंस का पायलट मौके से गाड़ी छोड़कर फरार हो गया।
जब पुलिस ने वाहन की तलाशी ली तो उसमें न कोई मरीज था और न ही कोई परिजन—बल्कि अवैध शराब की बड़ी मात्रा भरी हुई थी।
महेश्वर लोकेशन की जननी एक्सप्रेस से मिली 52 पेटी अवैध शराब
जानकारी के अनुसार वाहन क्रमांक CJ-04-NW-2385, जो महेश्वर लोकेशन की जननी एक्सप्रेस है, उसके अंदर से रात लगभग 2 बजे 52 पेटी अवैध शराब बरामद की गई। पुलिस अब फरार चालक और इस नेटवर्क के पीछे जुड़े लोगों की तलाश में है।
वेंडर बोला—‘मुझे पूरी जानकारी नहीं’
जिले में जननी एक्सप्रेस सेवा का ठेका सुशील बड़ोले के पास है। पूरे दिन संपर्क करने के बाद उन्होंने शाम को फोन उठाया और कहा कि उन्हें अभी घटना की पूर्ण जानकारी नहीं मिल पाई है। जबकि सूत्रों का दावा है कि दिनभर इस मामले को दबाने की कोशिशें चलती रहीं।
अफसरों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में
जननी एक्सप्रेस व 108 एंबुलेंस के जिला प्रबंधक सोहन गोत्रे का रवैया भी संदेह पैदा करता है। दिनभर मामले की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने मीडिया से बचने की कोशिश की। एक बार फोन उठाने के बाद “थोड़ी देर में बात करता हूँ” कहकर उन्होंने मोबाइल स्विच्ड ऑफ कर लिया या कॉल रिसीव नहीं किया।
सरकारी योजना की छवि धूमिल
जननी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण सेवा का इस तरह दुरुपयोग होना न केवल सरकारी योजना की मूल भावना को ठेस पहुँचाता है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवतियों के लिए वास्तविक खतरा भी पैदा करता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि आखिर एंबुलेंस का इस्तेमाल इतने बड़े स्तर पर अवैध शराब परिवहन के लिए कैसे हो रहा था? क्या वेंडर और अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह संभव है?
क्या जिम्मेदार केवल ड्राइवर को हटाकर कार्रवाई की खानापूर्ति कर देंगे?
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त जांच और ठोस कार्रवाई की ज़रूरत है।










