
बस्तर की परंपराओं और जनजातीय संस्कृति को मिलेगा वैश्विक मंच
रायपुर | KPN24.com | 28 दिसंबर 2025
बस्तर अंचल की समृद्ध लोकपरंपराओं, जनजातीय संस्कृति, कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी भव्य और आकर्षक स्वरूप में किया जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में जानकारी दी गई कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत
10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय,
24 से 30 जनवरी तक जिला स्तरीय एवं
1 से 5 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
विधाओं की संख्या बढ़कर हुई 12
इस वर्ष बस्तर पंडुम में सांस्कृतिक विधाओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। इनमें बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे।
बस्तर की आत्मा का सशक्त मंच है बस्तर पंडुम: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर पंडुम, बस्तर की असली आत्मा और सांस्कृतिक पहचान का सशक्त मंच है। आयोजन को सुव्यवस्थित, गरिमामय और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।
माँ दंतेश्वरी मंदिर परिसर में होगा लोगो व वेबसाइट का विमोचन
बैठक में बताया गया कि बस्तर पंडुम 2026 के लोगो, थीम गीत और आधिकारिक वेबसाइट का विमोचन माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर वरिष्ठ मांझी–चालकी, गायता–पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजन एवं पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकार उपस्थित रहेंगे।
विदेशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को भी आमंत्रण
इस बार विशेष रूप से भारत के विभिन्न देशों में पदस्थ भारतीय राजदूतों को आमंत्रित करने पर चर्चा हुई, ताकि वे बस्तर की अद्वितीय जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से रूबरू हो सकें। इसके साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को भी आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया।
ऑनलाइन व ऑफलाइन पंजीयन की सुविधा
प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस वर्ष ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से की जाएगी, जिससे अधिकाधिक कलाकारों एवं सांस्कृतिक समूहों की सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
तीन चरणों में पूरे बस्तर संभाग में आयोजन
उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खान-पान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुड़ियों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार हेतु यह आयोजन बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों एवं 1 नगर निगम क्षेत्र में किया जाएगा। आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है।
बैठक में ये रहे उपस्थित
बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, संस्कृति सचिव रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, संचालक विवेक आचार्य सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।










