
गणतंत्र दिवस समारोह के लिए छत्तीसगढ़ की झांकी का चयन
KPN24:- आगामी गणतंत्र दिवस समारोह में नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी देशभर के दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी। इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी में जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले डिजिटल संग्रहालय की अद्भुत और प्रेरणादायी झलक प्रस्तुत की जाएगी।
रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति द्वारा आयोजित कठोर चयन प्रक्रिया के बाद गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह के लिए छत्तीसगढ़ की झांकी को अंतिम रूप से चयनित किया गया है। यह चयन राज्य के लिए गर्व और सम्मान का विषय माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि यह डिजिटल संग्रहालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर में लोकार्पित किया जा चुका है। संग्रहालय जनजातीय आंदोलनों, संघर्षों और बलिदानों की गौरवगाथा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करता है।
झांकी के चयन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की झांकी के माध्यम से देश के नागरिकों को आदिवासी समाज की अटूट देशभक्ति, अदम्य साहस और बलिदान की गौरवशाली परंपरा से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। यह पूरे राज्य के लिए अत्यंत गर्व और उत्साह का क्षण है।
जनसंपर्क विभाग के सचिव रोहित यादव ने जानकारी दी कि सभी राज्यों द्वारा अपनी-अपनी झांकियों के प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजे गए थे। लगभग चार माह तक चली गहन मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद देश के 17 राज्यों की झांकियों को चयनित किया गया, जिनमें छत्तीसगढ़ की झांकी भी शामिल है। विशेषज्ञ समिति ने छत्तीसगढ़ की झांकी की विषयवस्तु, अभिनव डिज़ाइन और प्रस्तुति शैली की विशेष सराहना की।
जनसंपर्क आयुक्त रवि मित्तल ने बताया कि छत्तीसगढ़ की झांकी भारत सरकार की थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ पर आधारित है। झांकी में उन जनजातीय वीर नायकों के संघर्ष, त्याग और बलिदान को प्रभावी रूप से दर्शाया गया है, जिनकी स्मृति में यह डिजिटल संग्रहालय स्थापित किया गया है।
यह संग्रहालय नई पीढ़ी को प्रेरित करने के साथ-साथ जनजातीय समाज के योगदान को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान दिलाने का सशक्त माध्यम बन रहा है।
उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी का चयन केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के ऐतिहासिक योगदान के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।










