
KPN24:-जांजगीर–चांपा जिले का ग्राम कुटरा इन दिनों स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर चर्चा में है। यहां अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े शासकीय संस्थानों का निर्माण तेजी से हो रहा है। लेकिन विकास की इस चमक के बीच शिक्षा व्यवस्था की हकीकत बेहद चिंताजनक है।
गांव की रामसरकार शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला आज खंडहरनुमा भवन में संचालित हो रही है, जहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों की जान हर पल खतरे में बनी हुई है।
करीब 70 साल पुराना यह विद्यालय भवन अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। दीवारों में गहरी दरारें, जगह-जगह से झड़ता प्लास्टर और कमजोर हो चुकी छत कभी भी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकती है। बरसात और तेज हवा के दौरान हालात और भयावह हो जाते हैं। पालकों और ग्रामीणों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भारी चिंता व्याप्त है।
बताया गया है कि वर्ष 1954 में ग्राम के मालगुजार स्व. मालिकराम पाण्डेय ने अपने निजी व्यय और जनसहयोग से इस भवन का निर्माण कराया था। सात दशक बाद अब यह भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। सड़क निर्माण के दौरान विद्यालय के एक कक्ष को भी तोड़ा गया, जिससे संरचना और कमजोर हो गई। विभागीय स्तर पर डिस्मेंटल (ध्वस्तीकरण) की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई लंबित है, जिससे खतरा और बढ़ गया है।
फिलहाल विद्यालय का संचालन अतिरिक्त कक्षों में किया जा रहा है, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं है। बच्चे भय के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि जब कुटरा में मेडिकल कॉलेज जैसी बड़ी परियोजना साकार हो रही है, तो क्या बच्चों की बुनियादी शिक्षा के लिए सुरक्षित भवन उपलब्ध कराना प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?
एक नजर में
गांव: कुटरा, जिला जांजगीर–चांपा
विद्यालय: रामसरकार शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला
निर्माण वर्ष: 1954
भवन की आयु: लगभग 70 वर्ष
वर्तमान स्थिति: अत्यंत जर्जर, डिस्मेंटल प्रस्तावित
मांग: पुराने भवन को तत्काल गिराकर नए भवन का निर्माण
जनप्रतिनिधि की मांग
ग्राम पंचायत कुटरा के संरक्षक राघवेन्द्र पाण्डेय ने कलेक्टर को पत्र लिखकर जर्जर भवन को शीघ्र ध्वस्त कर नए भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।

उन्होंने कहा,
“विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोपरि है। जर्जर भवन को तत्काल गिराकर नए भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई मिल सके।”
ग्रामीणों की अपेक्षा
ग्रामीणों का कहना है कि विकास केवल बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं होना चाहिए। जिस गांव में मेडिकल कॉलेज बन रहा है, वहां मासूम बच्चों को खंडहर में पढ़ने के लिए मजबूर करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
अब कुटरा की जनता की निगाहें प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल साफ है — क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा, या समय रहते बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी?










