
KPN24:- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि शराब पीने के बाद इंसान जानवर बन जाता है। उच्चतम न्यायालय ने हृदय रोग विषेशज्ञ की उस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया जिसमें उसने अपनी सात साल की बेटी यौन उत्पीडन मामले में सजा को निलंबित करने की मांग की है।
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि डॉक्टर को निचली अदालत ने दोषी ठहराया है और वह उसे कोई राहत देने के पक्ष में नहीं है।
डॉक्टर राहत का हकदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने मौखिक रूप से कहा, “देखिए, उसने बच्चे के साथ किस तरह की हरकतें की हैं। आप किसी राहत के हकदार नहीं हैं। बच्चे ने आपके मुवक्किल के खिलाफ बयान दिए हैं। वह एक विकृत व्यक्ति है, उसे किसी निलंबन का हकदार नहीं माना जा सकता। वे नशे में थे।”
पीठ ने मौखिक रूप से कहा, “आप अपनी बेटी के साथ ऐसा नहीं कर सकते। वह पिता के खिलाफ गवाही क्यों देगी। वह एक छोटी बच्ची है, जिसने जिरह झेली है। शराब पीने के बाद आदमी जानवर बन जाता है। हमें ऐसा नहीं कहना चाहिए, लेकिन हम सबसे उदार पीठ हैं। अगर हम जमानत नहीं दे रहे हैं, तो इसके पीछे कारण हैं।” बता दें कि डॉक्टर ने शराब के नशे में यौन उत्पीड़न किया था।
डॉक्टर के वकील ने क्या कहा?
डॉक्टर की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि बेटी की गवाही को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया था। वकील ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 12 लाख से अधिक मामले लंबित हैं और दोषी के खिलाफ अपील पर निकट भविष्य में सुनवाई नहीं होगी। एफआईआर में पीड़िता की मां ने अपने पति पर उनकी बेटी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था।
पीड़िता की मां ने बताई डॉक्टर पति की हैवानियत
पीड़िता की मां ने बताया कि वह वाराणसी में रहती हैं, जबकि उनके पति हल्द्वानी में रहते हैं, जहां वह नर्सिंग होम चलाते हैं। 23 मार्च 2018 को डॉक्टर अपनी बेटी को अपने साथ हल्द्वानी ले गया और 30 मार्च को अपनी पत्नी को फोन करके उसे वापस ले जाने को कहा। बाद में लड़की ने अपनी मां को बताया कि उसके पिता एक बुरे आदमी हैं और उन्होंने उसके साथ गलत व्यवहार किया है।










