
मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर।
KPN24:- दुनियाभर में बीते कुछ सालों में आत्महत्या के प्रयास के मामलों में लगातार ईजाफा होता जा रहा है। एक सर्वे के मुताबिक दुनिया में हर 40 सेकंड में एक आत्महत्या का प्रयास होता है। इस सर्वे के मुताबिक आत्महत्या के कई कारण हो सकते है लेकिन सबसे बड़ा कारण ऐसे क्षण में किसी से अपनी बातें और परेशानी सांझा न कर पाना। इसी जड़ को पकड़ते हुए इस तरह के मामलों में कमी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय स्तर पर कुछ संस्थाओं के साथ मिलकर सामुहिक प्रयास शुरु किया है। जिसे गेटकीपर के नाम से जाना जाता है।
उल्लेखनीय है कि बीते करीब एक साल में सौ से ज्यादा मामले जिले में आत्महत्या के प्रयास के दर्ज है। इनमें दो तरह के मामले होते है। एक इसमें आत्मघाती व्यवहार संबंधी विकार आते हैं, जिसके पेशेंट जानता है कि उसके इस प्रयास से वह मरेगा नहीं, जैसे कीटनाशक पीना, अपने शरीर पर सिगरेट से दागना या ब्लेड से मारना। यह अटेंशन टेकिंग बिहेवियर कहलाता है। इससे परिजन या किसी नजदिकी व्यक्ति को अपनी तरफ अटेंशन देने या कोई बात मनवाने के लिए किया जाता है। इस तरह के प्रयास किशोरावस्था में ज्यादा होते है। अटेंशन टेकिंग बिहेवियर एटीबी के जिले में एक साल में 101 प्रयास हुए है।
दूसरा प्रकार नॉन सुसाईडल सेल्फ इंजूरी कहलाता है। इसमें सीवियर डिप्रेशन के 27 पेशेंट बीते एक साल में जिला अस्पताल में पहुंचे है। जिसमें से लाख प्रयास के बावजूद 7 की जान चली गई जबकि शेष 28 को गेटकीपर की मदद और सरकारी सांझा प्रयासों से बचा लिया गया। इसमें जो लोग जिंदगी को खत्म करना चाहते है, वो फंदे पर झूल कर, जानलेवा जहर खाकर, नदी-कुंए में कुद कर या रेल्वे ट्रेक पर जाकर ऐसा प्रयास करते है कि जीवित ही न बचें।
क्या है गेटकीपर
दरअसल, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, मनहित ऐप और टेलीमानस के संयुक्त कार्यक्रम का नाम है गेटकीपर। इस गेटकीपर का काम अपने आसपास के ऐसे लोगों को चिन्हित करना है, जो किसी भी तरह के मानसिक तनाव से गुजर रहे हो। इसकी थीम टेलीमानस के मनसा-वाचा-कर्मणा के जरीए बात करने से बनेगी बात की तर्ज पर तनाव ग्रस्त व्यक्ति से उसकी व्यथा जानकर उसे तनाव मुक्त खुशहाल जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। इसमें जिले का स्वास्थ्य विभाग हर संभव मदद नि:शुल्क करता है।
कौन बन सकता है गेटकीपर
बता दें कि गेटकीपर बनने के लिए कोई विशेष पात्रता या कोई शुल्क देने की आवश्यकता नहीं होती है। कोई भी व्यक्ति जिला अस्पताल के मानसिक स्वास्थ्य विभाग में जाकर इसकी सदस्यता लेकर अपना आईडी कार्ड बनवा सकता है। इसके बाद उस गेटकीपर को अपने दैनिक जीवन की जिम्मेदारियों के साथ ही अपने आसपास के तनावग्रस्त लोगों से बात कर उनकी हर संभव मदद मानसिक स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से करना होती है। कुल मिलाकर किसी भी तरह से आत्महत्या के प्रयास को रोकना ही गेटकीपर का मुख्य रोल होता है। अब तक जिले में करीब ढाई सौ गेटकीपर तैनात है, जो इस तरह के मामलों को रोकने में अपनी सक्रीय भूमिका अदा कर रहे है। इसमें सभी संप्रदाय के धर्मगुरु और प्रमुख भी शामिल हो सकते है। जो ऐसे लोगों को बुलाकर अंधविश्वास दूर कर लोगों को जीवन जीने को प्रोत्साहित करें और उन्हें चिंहित कर जिला अस्पताल में भेजें।
कैसे हो रहे सरकारी जतन
जिले में आत्महत्या के प्रयासों को रोकने के लिए मानसिक स्वास्थ्य विभाग और मनकक्ष द्वारा नुक्कड़ नाटक, रैली, सार्वजनिक कार्यक्रम और जयंति तथा पुण्यतिथियों पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से शहर सहित जिलेभर में लोगों को जागृत किया जाता है। लोगों को समझाईश दी जाती है कि तनाव की स्थिति में अकेले न रहें और अपनी परेशानी किसी भी नजदिकी व्यक्ति से सांझा करें। डॉ.देवेंद्र जडानिया जिनके पास मानसिक रोग विशेषज्ञ और नोडल अधिकारी मन कक्ष तथा मानसिक स्वास्थ्य का जिम्मा है, उनकी माने तो तमाम एनजीओ और शासकीय विभाग के सहयोग से नुक्कड़ नाटक, रैली, स्कूल-कॉलेजों में प्रदर्शन तथा शार्ट फिल्म के माध्यम से जीवन अनमोल है ऐसे नाश ना करें कर संदेश देते है। इसके साथ ही मनहित ऐप और टेलिमानस का 14416 ऐसी गोपनिय सेवाएं नि:शुल्क है, जो परामर्श देते है और आत्महत्या रोकथाम में मदद करते है।
फोटो- एक कार्यक्रम में समाजसेवी संस्था के सदस्य इसकी जानकारी देते हुए।










