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एक स्कूल ऐसा जो दें रहा पर्यावरण संरक्षण का संदेश

मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर

KPN24 :- देश सहित दुनियाभर में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रुप में मनाया जाता है। हमारे शहर सहित जिलेभर में भी इस दिन को लेकर तमाम जनप्रतिनिधियों से लेकर समाजसेवी संस्थाओं तक के पदाधिकारी और प्रशासनिक अफसरकर्मी भी एक पौधा रोपकर फोटो खिंचवाने तक इसको समेट देते है। इसके बाद उस पौधे की सुरक्षा या देखरेख से उन्हें कोई सरोकार नहीं होता है। पर्यावरण दिवस को एक इवेंट की तरह मनाकर इतिश्री कर ली जाती है। जबकि बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण पर्यावरण की अनदेखी ही है।

जिलेभर के अफसरकर्मी और जनप्रतिनिधि पर्यावरण को लेकर कितने चिंतित है, इसकी बानगी किसी भी सरकारी कार्यालय के परिसर में देखी जा सकती है। जिले का सबसे बड़ा सरकारी कार्यालय कलेक्टोरेट केंपस में ही उजाड़ पड़े गार्डन स्पेस को देखकर पर्यावरण के प्रति अफसरकर्मियों की निष्ठा और समर्पण की कहानी समझी जा सकती है। जबकि वन विभाग के कार्यालय और डिपो का हाल भी इससे जुदा नहीं है। ऐसे में पर्यावरण दिवस मनाना व्यर्थ है।
एक स्कूल जो दें रहा सार्थक संदेश
वहीं शहर का एक ऐसा निजी स्कूल है जो अपने चारों ओर शिक्षा के साथ पर्यावरण और हरियाली को समेटे हुए है और पर्यावरण को संस्कृति मानते हुए इसके संस्कार भी भावी पीढ़ी के अंदर बो रही है। हम बात कर रहे है शहर की शिक्षण संस्थान ट्रायंफल एकेडमी की। पॉलिटेक्निक कॉलेज के सामने स्थित करीब 9 वर्ष पुराना यह शिक्षण संस्थान पर्यावरण की परिभाषा को बेहद आसानी से सार्थक करता नजर आता है। इसके संचालक कमलेश पटेल की माने तो उनका स्कूल चारों ओर से पेड़-पौधों से घिरा है। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर इस स्कूल केंपस में दर्जनों तरह के फल-फूल और औषधियों के पौधे रोपे थे। जिनमें से ज्यादातर अब पेड़ बन चुके है। 9 साल पहले उनकी यह यात्रा शुरु हुई थी, जो अनवरत जारी है। पटेल ने बताया कि वे मूल रुप से किसान है और पर्यावरण और प्रकृति प्रेम उनके संस्कारों में है। ऐसे में उन्होंने स्कूल में शिक्षा के साथ पर्यावरण का प्रेम और महत्व भी स्कूली बच्चों को बांटने का लक्ष्य बनाया है। उनके स्कूल में बच्चों के लिए लगातार इस तरह के प्रेरक आयोजन होते है और महज बच्चों को ही नहीं उनके पालकों को भी वे पर्यावरण प्रेम के लिए प्रेरित करते है।
एक होटल जिसने दिखाई पर्यावरण की राह
कुछ इसी तरह शहर के बीचोबीच बस स्टैंड की भीड़ भरी जगह पर शोर-शराबे के बीच एक होटल ऐसा भी है, जो पर्यावरण प्रेम का संदेश बिना कुछ कहें दे रहा है। दरअसल हम बात कर रहे है बस स्टैंड स्थित अंबर होटल की। बाहर के भीड़ वाले शोरगुल के हिस्से से जैसे ही भीतर होटल में प्रवेश करते है तो यहां ऐसा लगता है जैसे किसी गार्डन में आ गए है। यहंा केवल हरियाली और पेड़ पौधे ही नहीं दर्जनों तरह के पशु-पक्षियों को भी बेखौफ घुमते-चहचहाते देखा जा सकता है। इसके संचालक होशंग हवलदार खुद एक पर्यावरणविद् होकर प्रकृति के बेहद करीब खुद को हमेशा रखते है। यहां आने वाले लोग उनके इस प्रेम से प्रभावित हुए बिना नहीं रहते। पूरे परिसर में बेहद शांति और प्राकृतिक माहौल होता है। जो यह संदेश देता है कि पर्यावरण से प्रेम करना हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा है और इसे एक दिन में बांधा नहीं जा सकता।
कारखानों से उठता धूंआ बढ़ा रहा प्रदुषण
बता दें कि शहर के उद्योग नगर सहित शहर भर के तमाम कल-कारखाने पर्यावरण को क्षति पहुंचा रहे है। इनकी चिमनियों से उठता धूंआ वायू प्रदुषण को बढ़ा रहा है तो इनसे निकलता वेस्टेज जहरीला पानी ताप्ती में मिलकर जल प्रदुषण फैला रहा है। इन पर सख्ती से कोई अंकुश लगाने में प्रशासन भी अब तक सफल नहीं हो पाया। इसके लिए न तो जिला प्रशासन कुछ कर पा रहा है और न ही नगर निगम। दरअसल, इसके लिए सीधा जिम्मेदार पर्यावरण विभाग होता है। अब विडंबना यह है कि सालों पहले बने इस जिले में अब तक पर्यावरण विभाग का दफ्तर तक नहीं खुल पाया है। ऐसे में पड़ोसी जिले खंडवा से कभी-कभार टीम आती है और औपचारिकता पूरी कर उसी दिन रवाना हो जाती है। महज चंद रुपयों का जुर्माना कर कागजी कार्रवाई कर पर्यावरण रक्षा की जिम्मेदारी पूरी कर ली जाती है। ऐसे में प्रदुषण फैलाने वालों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

विरान पड़ा कलेक्टोरेट परिसर।

इस केंपस में हरियाली के लिए जगह तो बहुत है लेकिन उसमें हरियाली ढूंढे से नहीं मिलती। पेड़-पौधों की देख-रेख नहीं होती। ऐेसे में विरान पड़ा यह केंपस हरियाली दिवस पर सबका ध्यान अपनी तरफ खींच सकता है। खासकर उन अफसरों और जनप्रतिनिधियों का जो आज के दिन एक पौधा औपचारिक तौर पर रोप कर फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड़ कर वाहवाही लूटते है। संदेश साफ है कि पर्यावरण के प्रति हमें दिखावटी नहीं ईमानदार प्रयास की दरकार है। हरियाली मीडिया और सोशल मीडिया पर नहीं शहर में दिखना चाहिए।

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Author: Kpn 24

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