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शराब के शौकिनों के लिए गुड न्यूज, अब नहीं देना होगी एमआरपी से ज्यादा कीमत,

मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर।

KPN24:- बुरहानपुर जिला प्रशासन और आबकारी विभाग के सांझा प्रयासों से शुक्रवार को जिले के शराब प्रेमियों के लिए अच्छी खबर आई है। इस खबर के अनुसार अब नियमित शराब उपभोक्ताओं की जेब पर पडऩे वाले अतिरिक्त बोझ में कमी आ सकेगी।

दरअसल, जिलेभर में संचालित शराब दुकानों में संचालकों द्वारा शराब प्रेमियों से एमआरपी से ज्यादा कीमतें वसूलने की लगातार शिकायतें आती रही है। इस पर नकेल कसने के लिए आबकारी विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से शराब के शौकिन के हित में प्रत्येक शराब दुकान के लिए क्यूआर कोड जारी कर चस्पा किए गए है। इन क्यूआर कोड को स्कैन करते ही शराब का ब्रांड और कीमत का पता चल जाएगा। इसके बाद अब किसी भी दुकान से संचालक या कर्मचारी तय कीमत से ज्यादा नहीं वसूल सकते।
उल्लेखनीय है कि जिलेभर की शराब ठेका दुकानों से शराबियों से तय कीमत से ज्यादा वसूूलने की शिकायतें आती रही है। बेचारे शराब प्रेमी कभी ठेका संचालक तो कभी सरकार को कोसते हुए मनमानी कीमतें देकर शराब की बोतल खरीदनें को मजबूर थे, लेकिन ये मजबूरी अब नहीं रही। इसके लिए शराब प्रेमियों का मानवीय पहलू देखते हुए जिला प्रशासन ने आबकारी विभाग के साथ मंथन कर बीच का रास्ता निकाला है। जिससे ने तो शराब ठेकेदार का नुकसान होगा और न ही बेचारे शराब प्रेमी की जेब पर मदिरापान का अतिरिक्त कीमत का बोझ पड़ेगा।
क्यूआर कोड स्कैन करते ही खुलेगी कुंडली
बता दें कि आधुनिक तकनीक का बेहतरीन उपयोग करते हुए प्रत्येक दुकान के लिए क्यूआर कोड डिजाईन किया गया है। जिसको शराब प्रेमी द्वारा स्कैन करते ही दुकान में मौजूद सभी ब्रांड की सभी मात्रा और प्रकार की बोतलों के ब्रांड नेम, एमआरपी और एमएसपी स्पष्ट अक्षरों में लिखी सामने आ जाएगी। अब किसी भी ठेका संचालक द्वारा इस कीमत से ज्यादा राशि वसूलने पर दुकानदार पर जुर्माना भी ठोंका जा सकेगा और निर्णय शराब प्रेमी के पक्ष में होगा।
एक दुकान पर तीन जगह लगे क्यूआर कोड
जिलेभर की 44 शराब दुकानों के लिए यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया। इस नियम के तहत प्रत्येक दुकान में 3 जगह साफ और बड़े क्यूआर कोड चस्पा किए गए है कि भीड़ के दौरान भी उपभोक्ता आसानी से अपने मोबाईल में क्यूआर कोड स्कैन कर अपना ब्रांड और बोतल तय कर कीमत देख सकता है।
एमआरपी और एमएसपी में अंतर
दरअसल, अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) और अधिकतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) का सीधा सा फंडा यह है कि क्यूआर कोड स्कैन करने पर जो भी ब्रांड और जो भी बोतल शराब प्रेमी तय करेगा, उसकी एमआरपी और एमएसपी दोनों लिखी होगी। दुकानदार एमएसपी से कम और एमआरपी से ज्यादा कीमत मांगे तो उसकी शिकायत की जा सकती है। शिकायत में सत्यता पाए जाने पर ठेका संचालक को जुर्माने की चपत भी जिला प्रशासन और आबकारी विभाग लगा सकता है।
शराब प्रेमियों में खुशी की लहर
शराब विक्रय में मूल्य नियंत्रण की खबर आते ही शराब प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। नाम न छापने की शर्त पर कई शराब प्रेमियों ने बताया कि हम मनमानी कीमतें वसूलने से परेशान थे लेकिन किसे शिकायत करते और कौन सुनवाई करता। ठेका संचालक साफ कहते थे कि लेना हो तो लो, नहीं तो चलते बनों। लेकिन इस तरह के सरकारी प्रयास से शराब प्रेमियों के खुशी का माहौल है। अब हमारे साथ भी न्याय हो रहा है और अब मनमानी करने पर इसकी सीएम हेल्पलाईन 181 पर शिकायत भी की जा सकती है।

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Author: Kpn 24

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