
मनीष विद्यार्थी बुरहानपुर।
KPN24:- लगातार चर्चाओं में बने रहने वाला जिला अस्पताल रक्तदान दिवस के दिन दो घटनाओं को लेकर चर्चाओं में रहा। एक खबर विश्व रक्तदान दिवस की जिसमें प्रबंधन ने रक्तदाताओं का सम्मान कर सराहनीय कार्य किया तो दूसरी खबर सीविल सर्जन चेंबर से जुड़ी। जिसमें महज 4 दिन पहले सीविल सर्जन का प्रभार संभाले डॉ.दर्पण टोके को बाहर का रास्ता दिखाकर पूर्व सीएस डॉ.प्रदीप मोजेस वापस लौटे है।
गौरतलब है कि एक बार गुजरात में अपनी गिरफ्तारी पर वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि मेरा पानी उतरते देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना। मैं समंदर हूं, एक दिन लौट कर जरुर आउंगा। इन पंक्तियों को चरितार्थ करते हुए 4 दिन पहले सीएस डॉ. प्रदीप मोजेस को अस्पताल प्रबंधन ने हटाकर शाहपुर बीएमओ बना दिया था। जिसे उनके डिमोशन के रुप में देखा जा रहा था। जिसके बाद खामोश बैठने की बजाय बीएमओ डॉ. मोजेस ने हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट ने दिया स्टे, डॉ.टोके से भी होगा जवाब तलब
स्वास्थ्य विभाग द्वारा बीएमओ बनाए जाने के बाद डॉ. मोजेस ने सीधे जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जहां से उन्हें बड़ी राहत मिली हैं। 12 जून को हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए शासन के स्थानांतरण 7 जून के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। इतना ही नहीं एक नोटिस जारी कर चार हफ्तों के भीतर शासन सहित डॉ.टोके से जवाब तलब किया है।
क्या था मामला
सीएस डॉ.मोजेस ने शासन के द्वारा जारी उनके 7 जून के स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए एक रिट पिटीशन दायर की, जिसमें उल्लेख किया गया हैं कि उनसे सीएस और एचएस पद से हटाकर शाहपुर बीएमओ बना दिया गया। डॉ.मोसेस ने अपनी याचिका से इस ट्रांसफर आदेश को इस आधार पर चुनौती दी कि ऐसा डॉ.टोके को समायोजित करने के लिए किया गया। जबकि वे डॉ.मोजेस से बहुत जुनियर है। याचिका में इस बात का भी उल्लेख किया गया हैं कि यदि इस विवादित आदेश को लागू किया गया तो डॉ.मोजेस को अपने जूनियर के अधीन काम करना होगा, जो सेवा न्यायशास्त्र में विपरीत है।
क्या कहा हाईकोर्ट ने
याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस अमित सेठ ने अपने आदेश में प्रतिवादियों को 7 दिन में पीएफ के भुगतान के लिए नोटिस जारी करने तथा नोटिस का जवाब एक माह के भीतर देने का आदेश दिया। साथ ही यह भी कहा कि अगली सुनवाई तक ट्रांसफर आदेश प्रभावशून्य रहेगा। याने तब तक वापस डॉ.मोजेस ही सीविल सर्जन रहेंगे।
डॉ.टोके की कार्यप्रणाली की हुई सराहना
हालांकि सीनियर और जुनियर का मामला छोडक़र बात करें तो महज 4-5 दिनों का जो कार्यकाल डॉ.टोके का रहा, उसकी दबी जुबान में अस्पताल प्रबंधन से लेकर जनसामान्य तक प्रशंसा की जा रही है और व्यवस्थाओं के लिए उनके द्वारा किए जा रहे जतन को सभी ने सराहा। अब तक विवादों से दूर रहे डॉ.टोके बीमार जिला अस्पताल को बेहतर करने के लिए प्रयासरत रहे और जनसामान्य से जुड़े रहे। कार्यभार संभालते ही उनके शाम की ओपीडी का आदेश लागू करना और स्वयं भी उस दौरान चेंबर में उपस्थित रहकर मरीजों की नब्ज टटोलना, लोगों को भा गया था।










