
KPN24:- छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल को रेलवे से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित दल्लीराजहरा–रावघाट रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। 95 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के 97 प्रतिशत कार्य पूरे हो चुके हैं, और इसे दिसंबर 2025 तक पूरी तरह से चालू कर दिए जाने की उम्मीद है। इस परियोजना के अंतर्गत तारोकी–रावघाट खंड (77.5 किमी) का अधिकांश कार्य पूर्ण हो चुका है, जहां यूटिलिटी शिफ्टिंग का कार्य शत-प्रतिशत और पुलों व ट्रैक निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
इस परियोजना के पूर्ण होते ही बस्तर क्षेत्र को पहली बार राज्य की राजधानी से सीधी रेलवे कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे जहां यात्रियों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी, वहीं खनिज परिवहन को भी नई गति मिलेगी। बस्तर के सामाजिक-आर्थिक विकास में यह परियोजना मील का पत्थर साबित होने जा रही है।
लौह अयस्क खदानों से स्टील प्लांट तक सीधी कनेक्टिविटी
यह रेलवे लाइन रावघाट की लौह अयस्क खदानों को सेल/भिलाई इस्पात संयंत्र से सीधे जोड़ देगी। दल्लीराजहरा की मौजूदा खदानों में लौह अयस्क की घटती उपलब्धता के बीच यह परियोजना औद्योगिक आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास की रीढ़ बनेगी।
विकास की दिशा में ठोस प्रगति
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के अनुसार—
17.5 किलोमीटर भूमि अधिग्रहण का कार्य पूर्ण हो चुका है।
21.94 लाख घन मीटर मिट्टी कार्य में अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है।
3 प्रमुख पुलों में से 2 पुल तैयार हैं।
61 में से 55 छोटे पुलों का निर्माण पूर्ण है।
बैलेस्ट प्रोक्योरमेंट और भवन निर्माण कार्य अगस्त–सितंबर तक पूर्ण हो जाएगा।
परियोजना में कुल निर्माण कार्य
पूरे 95 किमी के रेलमार्ग में—
16 बड़े पुल
19 रोड ओवर ब्रिज
45 रोड अंडर ब्रिज
176 छोटे पुल शामिल हैं।
सिर्फ तारोकी–रावघाट खंड में ही—
3 प्रमुख पुल,
5 रोड ओवर ब्रिज,
7 रोड अंडर ब्रिज,
49 छोटे पुल बनाए जा रहे हैं।
इन सभी निर्माण कार्यों में उच्च तकनीकी मानकों और सुरक्षा उपायों का पालन किया जा रहा है।
नक्सली चुनौती के बीच विकास की राह
यह परियोजना वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में स्थित है, जहां निर्माण कार्य अनेक चुनौतियों से गुज़रा है। अब तक 12 नक्सली हमलों में 4 श्रमिकों की मौत और 2 सुरक्षाकर्मियों की शहादत हो चुकी है। कई बार मशीनों और उपकरणों को क्षतिग्रस्त भी किया गया। बावजूद इसके, एसएसबी द्वारा सुरक्षा प्रदान किए जाने के बाद कार्य में उल्लेखनीय तेजी आई है।
बस्तर को मिलेगी विकास की नई दिशा
इस रेलवे परियोजना के पूरा होने से—
खनिज परिवहन को मजबूती मिलेगी
स्थानीय व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा
रोजगार के अवसर सृजित होंगे
यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी
बुनियादी ढांचा और निवेश के अवसर बढ़ेंगे
नवंबर 2025 तक तारोकी–रावघाट खंड पर ट्रेन परिचालन शुरू होने की संभावना जताई गई है। यह परियोजना न केवल बस्तर को रेलवे मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगी, बल्कि क्षेत्र के विकास की नई कहानी भी लिखेगी।
रेल पटरी पर दौड़ती ट्रेनें अब सिर्फ खनिज या माल ही नहीं लाएंगी, बल्कि रोजगार, अवसर और समृद्धि की भी सौगात लेकर आएंगी।










