
KPN24:- मध्यप्रदेश के धार जिले के मनावर स्वतंत्रता दिवस के दिन नगर में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को मौके से बरामद सुसाइड नोट में छात्रा ने अपने विद्यालय की तीन शिक्षिकाओं—सारिका ठाकुर, लक्ष्मी मंडलोई और आरती चौहान—को मानसिक प्रताड़ना के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
सुसाइड नोट में लिखा है— “मैं ऐसे ही नहीं फांसी लगा रही हूं। मेरी मौत की वजह मेरे स्कूल की तीन टीचर हैं, जो मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित करती थीं। आज स्कूल में जो हुआ, उसके बाद मेरे सहने की सीमा खत्म हो गई है। दोषियों को सजा दिलाई जाए।”
जानकारी के अनुसार, छात्रा ने सुसाइड नोट घर की दीवार पर चिपकाया और फिर अपने कमरे में फांसी का फंदा लगाकर जान दे दी। घटना के समय घर में वह अकेली थी। उसके पिता बाजार गए हुए थे, बहन नौकरी पर थी और मां राखी के अवसर पर मायके गई थीं। घर लौटने पर परिजनों ने उसे फंदे पर लटका पाया और अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
छात्रा की सहेलियों और परिजनों ने आरोप लगाया है कि तीनों शिक्षिकाएं लंबे समय से उसे छोटी-छोटी बातों पर सार्वजनिक रूप से अपमानित करती थीं और अनुचित टिप्पणियां करती थीं। शिकायतें विद्यालय प्रशासन और विद्यार्थी परिषद तक भी पहुंचीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
घटना के बाद नगर में गहरा आक्रोश है। सामाजिक और छात्र संगठनों ने दोषी शिक्षिकाओं पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। आक्रोशित लोगों ने शव को सड़क पर रखकर करीब एक घंटे तक चक्का जाम भी किया।
पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, विद्यालय प्रशासन ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह घटना न केवल एक छात्रा की मौत का दर्दनाक मामला है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में मानसिक उत्पीड़न और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दों पर भी सवाल खड़ा करती है।










