
KPN24:- जांजगीर-चांपा जिले की साइबर टीम और चांपा थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर धोखाधड़ी में उपयोग किए जा रहे म्यूल अकाउंट (फर्जी बैंक खातों) का खुलासा किया है। इन खातों के जरिए एक करोड़ 62 लाख रुपए से अधिक का अवैध लेन-देन किया गया था। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप व एसडीओपी चांपा यदुमणि सिदार के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई। प्रारंभिक जांच में 100 से अधिक संदिग्ध खातों की पहचान हुई है, जिन पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कैसे हुआ खुलासा
साइबर टीम ने ICICI बैंक चांपा शाखा में संदिग्ध लेन-देन की जांच की, जिसमें करीब ₹1,62,67,142 का अवैध ट्रांजेक्शन पाया गया।
जांच में पता चला कि ये खाते साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए उपयोग किए जा रहे थे।
आरोपियों के खिलाफ थाना चांपा में अपराध क्रमांक 364/2025 और 365/2025 धारा 317(2), 317(4), 317(5) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया।
गिरफ्तार आरोपी
1. पंकज कुमार खूंटे (25 वर्ष) निवासी कवली केनापाली थाना डभरा, जिला सक्ति
2. बलराम यादव उर्फ बल्लू (29 वर्ष) निवासी जैजैपुर, जिला सक्ति
3. हरीश यादव (31 वर्ष) निवासी जैजैपुर, जिला सक्ति
पुलिस टीम का योगदान
इस कार्रवाई में निरीक्षक जय प्रकाश गुप्ता (थाना प्रभारी चांपा), निरीक्षक सागर पाठक (साइबर सेल प्रभारी) सहित साइबर टीम और थाना चांपा के कई अधिकारियों व कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
क्या है “मनी म्यूल”?
पुलिस ने बताया कि “मनी म्यूल” वह व्यक्ति होता है, जिसके बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट का उपयोग साइबर अपराधी ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने में करते हैं।
ठग लोगों को नौकरी, इनाम या निवेश का लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं।
मनी म्यूल अपने खाते से पैसे को किसी और खाते में भेजता है, ताकि अपराधियों की पहचान छिपी रहे।
यह गंभीर अपराध है, जिसमें शामिल व्यक्ति पर मनी लॉन्ड्रिंग, संपत्ति जब्ती और जेल जैसी सजा हो सकती है।
पुलिस की अपील
अनजान स्रोतों से धन प्राप्त करने से बचें।
अपने बैंक खाते और वित्तीय जानकारी को सुरक्षित रखें।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत बैंक या पुलिस को दें।
जांजगीर-चांपा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मनी म्यूल बनना गंभीर अपराध है। चाहे जानबूझकर या अनजाने में, यदि कोई व्यक्ति अपना खाता साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराता है तो वह मुख्य अपराधी जितना ही दोषी माना जाएगा।










