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कानून पर भारी पड़ रहा बीजेपी नेता का रसूख, 100 एकड़ सरकारी जमीन पर तान दिया होटल

KPN24:- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जहाँ छत्तीसगढ़ में सुशासन और पारदर्शिता लाने की बात कर रहे हैं, वहीं उनकी ही पार्टी के एक पार्षद पर सरकारी जमीन पर कब्जे और अवैध निर्माण का गंभीर आरोप लग रहा है। अंबिकापुर नगर निगम के बीजेपी पार्षद आलोक दुबे पर आरोप है कि उन्होंने 17 एकड़ दान में मिली निजी जमीन की आड़ में 100 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया और वहां होटल, इमारतें और प्लॉटिंग तक कर दी।

अदालत का आदेश भी बेअसर

मामला अदालत तक पहुंचा तो दुबे अपनी 117 एकड़ जमीन का ठोस सबूत पेश नहीं कर सके। हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूरी जमीन को सरकारी भूमि घोषित करते हुए उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने और एफआईआर कराने के आदेश दिए। इसके बावजूद अब तक दुबे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कमिश्नर के 8 पत्र, तहसीलदार की चुप्पी

सरगुजा कमिश्नर ने पिछले पाँच वर्षों में आठ बार अंबिकापुर तहसीलदार को पत्र लिखकर आलोक दुबे और उनके परिजनों पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए।

पत्र क्रमांक 626 दिनांक 21.02.2019

पत्र क्रमांक 2415 दिनांक 29.08.2019

पत्र क्रमांक 337 दिनांक 10.02.2020

पत्र क्रमांक 2530 दिनांक 11.12.2020

पत्र क्रमांक 2686 दिनांक 25.10.2021

पत्र क्रमांक 3534 दिनांक 02.02.2022

पत्र क्रमांक 651 दिनांक 13.05.2022

इसके बाद भी तहसीलदार कार्यवाही करने से बचते रहे। सूत्रों का कहना है कि दुबे के रसूख और उनके रिश्तेदार के जज होने के कारण अधिकारी किसी प्रकार की कार्रवाई से कतराते हैं।

सत्ता बदलते ही बदला ठिकाना

गौरतलब है कि आलोक दुबे कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत कर चुके थे। भूपेश बघेल सरकार के दौरान भी उन पर जमीन कब्जे का मामला उठा था। सत्ता परिवर्तन के बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया और नगर निगम में पार्षद बन गए। इसके बाद भी प्रशासन उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठा सका।

सुशासन पर सवाल

आलोक दुबे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वरिष्ठ नेताओं के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर भरी पड़ी हैं। लेकिन यही नजदीकियां उनके खिलाफ कार्रवाई में सबसे बड़ी बाधा बनती दिख रही हैं।

कमिश्नर द्वारा बार-बार लिखे गए पत्र और अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद आज तक न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही कब्जाई गई जमीन सरकार को वापस मिल पाई। सवाल उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन के दावे पार्टी के रसूखदार नेताओं के सामने बौने पड़ते जा रहे हैं?

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Author: Kpn 24

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