
KPN24:- सक्ति जिले के जनपद पंचायत जैजैपुर अंतर्गत ग्राम कोटेतरा से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने इंसानियत और संवेदना की नई मिसाल पेश की है। यहां गांववालों ने एक घायल बंदर की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार धार्मिक रीति-रिवाजों से किया — जैसे किसी अपने परिवार के सदस्य का किया जाता है।
गांव में पसरा शोक, आंखें नम हुईं
मिली जानकारी के अनुसार, 4 अक्टूबर को एक बंदर किसी स्थान से घायल अवस्था में कोटेतरा गांव पहुंचा था। जैसे ही इसकी जानकारी ग्राम की मुखिया सुनीता रमेश साहू को मिली, उन्होंने तत्काल स्थानीय डॉक्टरों को बुलाकर बंदर का इलाज करवाया। लेकिन इलाज के प्रयास असफल रहे और कुछ ही घंटों बाद बंदर ने दम तोड़ दिया।
बंदर की मौत की खबर जैसे ही फैली, गांव का माहौल शोकमय हो गया। गुड़ी चौक पर ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर किसी की आंखें नम थीं, मानो उन्होंने अपना कोई अपना खो दिया हो।
जानवर नहीं, परिवार का सदस्य माना
गांववालों ने इस बंदर को केवल एक जानवर नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य माना। उन्होंने मिलजुलकर बंदर की अंतिम यात्रा निकाली और पूरी धार्मिक विधि-विधान से उसका अंतिम संस्कार किया। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने भावुक होकर श्रद्धांजलि दी। पूरे गांव में घंटों तक मातम का माहौल बना रहा।
मानवता की अनोखी मिसाल
जहां एक ओर लोग अक्सर जानवरों के प्रति उदासीन रहते हैं, वहीं कोटेतरा के ग्रामीणों ने यह साबित किया कि सच्ची मानवता सिर्फ इंसानों के लिए नहीं, बल्कि हर जीव के प्रति करुणा रखने में है।
यह घटना न सिर्फ भावुक कर देने वाली है, बल्कि यह समाज को यह संदेश भी देती है कि इंसानियत अब भी जीवित है — बस जरूरत है दिल से महसूस करने की।










