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मिट्टी ने बदली तकदीर – बंजर ज़मीन पर लहलहाई हरियाली, किसान रामनारायण बने मिसाल

KPN24:- कहते हैं कि जब किसान ठान ले तो बंजर धरती भी सोना उगलने लगती है। ऐसा ही प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है जिले के बलौदा विकासखंड के ग्राम पंचायत बगडबरी के किसान रामनारायण आदिले ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत भूमि समतलीकरण कार्य से न केवल उनकी सूखी ज़मीन उपजाऊ बन गई, बल्कि गांव के कई परिवारों को रोजगार भी मिला।

बंजर ज़मीन से उपजाऊ खेत तक का सफर

कभी जिस खेत में ऊबड़-खाबड़ मिट्टी और पानी का ठहराव खेती में बाधा बनता था, वहीं आज सुनहरी फसलें लहरा रही हैं।
ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर किसान रामनारायण ने अपने खेत के भूमि समतलीकरण कार्य की मांग की थी, जिसे तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद ₹95,644 की प्रशासकीय स्वीकृति राशि पर पूरा किया गया।
अक्टूबर 2023 में शुरू होकर नवंबर 2023 में कार्य पूर्ण हुआ। इस दौरान 9 श्रमिक परिवारों को रोजगार मिला और 388 मानव दिवस सृजित हुए — जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली।

किसान की मेहनत और मिट्टी का मेल

रामनारायण बताते हैं कि पहले उनकी ज़मीन में पानी नहीं ठहरता था और फसल की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी। लेकिन भूमि समतलीकरण के बाद खेत की उर्वरता बढ़ी, सिंचाई आसान हुई और पहली ही बार में चार क्विंटल धान का उत्पादन प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा, “अब खेत समतल हो चुका है, पानी टिकता है और हल चलाना भी आसान हो गया है। पहले जहाँ कुछ भी नहीं उगता था, अब वहीं हरियाली फैल गई है।”

किसानों के लिए प्रेरणा बनी कहानी

रामनारायण की सफलता देखकर गांव के अन्य किसान भी अपनी बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
रोजगार सहायक ने बताया कि यह मनरेगा योजना का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने रोजगार, उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण—तीनों को एक साथ बढ़ावा दिया है।

मनरेगा से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला नया जीवन

मनरेगा के अंतर्गत ऐसे भूमि सुधार कार्यों ने न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाई है, बल्कि गांवों में स्थायी विकास की नींव रखी है।
किसान रामनारायण की यह कहानी साबित करती है कि यदि योजनाएं सही दिशा में लागू हों और किसानों को अवसर मिले, तो ग्रामीण भारत आत्मनिर्भर बन सकता है।

निष्कर्ष:
रामनारायण आदिले का यह प्रयास केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उस मिट्टी का सम्मान है जो मेहनत से फिर से हरी-भरी हुई है। मनरेगा जैसी योजनाएँ जब किसान के हाथों से जुड़ती हैं, तब वे सिर्फ रोजगार नहीं — बल्कि उम्मीदों की फसल उगाती हैं।

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Author: Kpn 24

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