
11 साल के अलगाव के बाद पति को मिला तलाक, पत्नी को 20 लाख स्थायी भरण–पोषण देने का आदेश
KPN24:- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पत्नी द्वारा पति को लगातार शारीरिक संबंध बनाने से रोकना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक अर्जी खारिज किए जाने के आदेश को पलटते हुए पति की अपील स्वीकार कर ली है।
जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस ए.के. प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि पति-पत्नी के बीच 11 वर्षों का अलगाव और पत्नी की वैवाहिक संबंध बनाने में स्पष्ट अनिच्छा को मानसिक प्रताड़ना माना जाएगा। कोर्ट ने पति को निर्देश दिया कि वह अपनी पत्नी को दो माह के भीतर 20 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता प्रदान करे।
मामला : शादी के एक महीने बाद ही पत्नी मायके चली गई
अंबिकापुर निवासी 45 वर्षीय युवक की शादी 30 मई 2009 को रायपुर की युवती से हिंदू रीति–रिवाजों के साथ हुई थी। पति का आरोप है कि शादी के कुछ ही दिनों बाद पत्नी उसे छोड़कर मायके चली गई और वैवाहिक दायित्व निभाने से साफ इनकार कर दिया।
पति ने फैमिली कोर्ट में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(i-a) के तहत तलाक की अर्जी दाखिल करते हुए आरोप लगाया कि पत्नी शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करती रही और यहां तक कह दिया कि यदि पति ने संबंध बनाने की कोशिश की तो वह आत्महत्या कर लेगी।
2013 में पत्नी कुछ माह अंबिकापुर में पति के साथ रही, लेकिन तब भी उसने संबंध बनाने से मना कर दिया। मई 2014 के बाद वह लगातार मायके में ही रह रही है और पति के प्रयासों के बावजूद वापस नहीं लौटी। न ही उसने किसी पारिवारिक कार्यक्रम या दुख–सुख में भागीदारी की।
पत्नी का पक्ष : पति साध्वी भक्ति और योग में लीन, वैवाहिक संबंधों में रुचि नहीं
पत्नी ने पति के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि उसके पति साध्वी की भक्ति और योग साधना में इतने लीन रहते थे कि वैवाहिक संबंधों में रुचि ही नहीं लेते थे। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति बच्चे नहीं चाहता था और उसे मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना मिलती थी।
पत्नी द्वारा वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए दायर अर्जी भी बाद में वापस ले ली गई। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका को खारिज कर दिया था। जिसके बाद पति ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।
हाईकोर्ट की टिप्पणी : लंबा अलगाव और संबंधों से इनकार मानसिक क्रूरता
हाईकोर्ट ने रिकार्ड और दोनों पक्षों के बयान का परीक्षण करते हुए कहा कि पति-पत्नी पिछले 11 वर्षों से अलग रह रहे हैं। क्रॉस एग्जामिनेशन में पत्नी ने स्वीकार किया कि वह अब पति के साथ नहीं रहना चाहती।
अदालत ने माना कि इतने लंबे समय तक अलग रहना और वैवाहिक संबंधों में पुनः लौटने से इनकार करना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है।










