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48वां रावत नाचा महोत्सव : लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

KPN24 :- बिलासपुर के लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में 48वां रावत नाचा महोत्सव अत्यंत धूमधाम और पारंपरिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। महोत्सव में शामिल होने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विशेष रूप से बिलासपुर पहुंचे, जहां महोत्सव के संरक्षक कालीचरण यादव एवं समिति पदाधिकारियों ने पुष्पहार पहनाकर उनका आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री और अतिथियों ने भगवान श्रीकृष्ण के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

हज़ारों लोगों की मौजूदगी, जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह, बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया और महापौर सुश्री पूजा विधानी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मैदान दर्शकों से खचाखच भरा था।

पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे मुख्यमंत्री, कलाकारों का बढ़ाया उत्साह

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस अवसर पर पारंपरिक रावत नाचा वेशभूषा में मंच पर पहुंचे और कलाकारों से रुबरु होकर उनका मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कहा—
“यदुवंशी समाज वह समाज है, जिसने भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाया है। छत्तीसगढ़ की यह नृत्य–गायन परंपरा हमारी सांस्कृतिक एकता और समृद्धि का जीवंत प्रतीक है।”

मुख्यमंत्री ने मंच से प्रसिद्ध दोहा ‘तेल फूल में लइका बाढ़े…’ गाकर नर्तक दलों और यदुवंशी समाज को आशीर्वचन दिया। उनके साथ नर्तक दलों ने पारंपरिक ढोल–नगाड़ों की थाप पर ताल मिलाकर अद्भुत माहौल निर्मित किया।

मंच पर गूंजे संस्कृति और एकता के संदेश

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने रावत नाचा को यदुवंशी समाज के शौर्य और सांस्कृतिक धरोहर का अनुपम प्रदर्शन बताया।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा—
“48 वर्षों की निरंतरता समाज की अनुशासन, एकजुटता और सांस्कृतिक गर्व की मिसाल है।”

बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल ने कहा कि रावत नाचा बिलासपुर की 48 वर्षों की सांस्कृतिक धरोहर है, जिसका संरक्षण समाज द्वारा निरंतर किया जा रहा है।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि बिलासा की पावन भूमि पर इस महोत्सव का होना सौभाग्य की बात है और यदुवंशी समाज हर घर में जाकर सर्व समाज की मंगलकामना करता है।

समिति ने बताया—47 वर्षों की विरासत का सम्मान

महोत्सव के संरक्षक डॉ. कालीचरण यादव ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि रावत नाचा महोत्सव यदुवंशी समाज की संस्कृति, सम्मान और अस्तित्व का सशक्त प्रतीक है, जिसका संरक्षण पिछले 47 वर्षों से लगातार किया जा रहा है।

ढोल–नगाड़ों की थाप पर झूमे कलाकार और मुख्यमंत्री

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक क्षण वह रहा जब मुख्यमंत्री श्री साय रावत नाचा दलों के बीच पहुंचे और उनके साथ पारंपरिक धुनों पर झूमकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि—
“रावत नाचा जैसी सांस्कृतिक विरासत हमारी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी और हमारी परंपराओं को जीवित रखेगी।”

48वां रावत नाचा महोत्सव अपने उत्साह, परंपरा और सांस्कृतिक ऊर्जा के साथ बिलासपुर की स्मृतियों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।

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Author: Kpn 24

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