
भुवनेश्वर में रहते हुए भी श्रीमती सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र किया प्राप्त
KPN24:- डिजिटल भारत अभियान और छत्तीसगढ़ शासन की उन्नत ई-सेवाएँ आम नागरिकों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं। समय, श्रम और संसाधनों की बचत करते हुए सरकारी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में यह मजबूत कदम है। भुवनेश्वर में रहने वाली श्रीमती सोनम त्रिपाठी का अनुभव इसका शानदार उदाहरण है।
उन्होंने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता के डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र को ऑनलाइन प्राप्त कर एक जटिल प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया। यही दस्तावेज़ उनकी बीमार माता के बैंक खाते के स्थानांतरण में सहायक साबित हुआ।
इंटरनेट और डिजिटल व्यवस्था ने दिखाई राह
विवाह के बाद भुवनेश्वर में रह रही श्रीमती त्रिपाठी के माता–पिता बिलासपुर में निवासरत थे। पिता के निधन के पश्चात नगरपालिका, बिलासपुर द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया था। लेकिन जब माताजी की तबीयत अचानक बिगड़ी और उन्हें भुवनेश्वर लाना पड़ा, तब बैंक खाते के ट्रांसफर की प्रक्रिया में डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र अनिवार्य दस्तावेज़ के रूप में मांगा गया। जानकारी के अभाव में यह प्रक्रिया कुछ समय के लिए रुक गई और परिवार असमंजस में पड़ा।
समाधान की खोज में श्रीमती त्रिपाठी ने इंटरनेट की सहायता ली और छत्तीसगढ़ के जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यालय से फोन पर संपर्क किया। संबंधित कर्मचारी ने उन्हें पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया, आवश्यक दस्तावेज़ों की सूची भेजी और आवेदन के तरीके की पूरी सहायता की। कुछ ही दिनों में डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन उपलब्ध हो गया और बैंक से संबंधित सभी प्रक्रिया तुरंत पूर्ण हो गई।
“डिजिटल सेवाएँ समय बचाती हैं और कठिन काम को सरल बनाती हैं”—श्रीमती सोनम त्रिपाठी
श्रीमती त्रिपाठी ने कहा—
“यदि मुझे यह डिजिटल प्रक्रिया पहले से पता होती, तो मेरा काम और पहले पूरा हो जाता। मैंने भुवनेश्वर से ही ऑनलाइन प्रक्रिया की और प्रमाण पत्र कुछ दिनों में मिल गया। डिजिटल सेवाएँ लोगों को समय, मेहनत और परेशानी से बचाती हैं। हर नागरिक को जरूरी दस्तावेज़ समय रहते डिजिटल रूप में तैयार रखने चाहिए।”
डिजिटल छत्तीसगढ़: अब हर नागरिक के ‘एक क्लिक’ पर सरकारी सेवाएँ
पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, शिकायत निवारण, सेवा आवेदन स्थिति, प्रमाण पत्र उपलब्धता सहित कई सरकारी सेवाएँ डिजिटल हो चुकी हैं। बिलासपुर से बस्तर तक नागरिक घर बैठे कई महत्वपूर्ण कार्य पूरा कर रहे हैं। इससे न सिर्फ समय और पैसा बच रहा है, बल्कि प्रक्रियाएँ अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनी हैं।
प्रेरणादायक उदाहरण
श्रीमती सोनम त्रिपाठी का अनुभव दर्शाता है कि तकनीक, आधुनिक व्यवस्था और संवेदनशील प्रशासन मिलकर कैसे कठिन और महत्वपूर्ण कार्यों को भी सरल व तेज़ बना सकते हैं। यह कथा उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो पारंपरिक जटिल प्रक्रियाओं से परेशान होते हैं।
निष्कर्ष
“डिजिटल छत्तीसगढ़” आज आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव ला रहा है। भुवनेश्वर में रहकर बिलासपुर से डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र और बैंक प्रक्रिया पूरा करना इसका जीवंत प्रमाण है। यह राज्य सरकार की ई-गवर्नेंस, पारदर्शिता और दक्षता का शानदार उदाहरण है।










