
द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने चार दोषियों को सुनाई 5-5 साल की सज़ा
KPN24:- छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत को झकझोर देने वाले बहुचर्चित पोराबाई नकल प्रकरण में आखिरकार न्याय की जीत हुई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए छात्रा पोराबाई, तत्कालीन प्राचार्य एस.एल. जाटव, फूलसाय नृशी एवं दीपक जाटव को दोषी करार देते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास तथा 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
यह मामला वर्ष 2008 का है, जब बिर्रा हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा पोराबाई ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा में प्रदेश की प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान हासिल कर पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी।
हालांकि, उपलब्धि की इस चमक के पीछे बड़ा फर्जीवाड़ा छिपा था। जांच में खुलासा हुआ कि उत्तर पुस्तिकाओं में दस्तावेजी हेराफेरी, गंभीर अनियमितता और सुनियोजित साजिश के जरिए छात्रा को टॉपर घोषित किया गया।
मामला उजागर होने के बाद पोराबाई सहित तत्कालीन प्राचार्य, केंद्राध्यक्ष एवं अन्य शिक्षकों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया। करीब वर्षों तक चले लंबे कानूनी संघर्ष के बाद दिसंबर 2020 में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट, चांपा ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया था।
इसके पश्चात राज्य शासन ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए द्वितीय अपर सत्र न्यायालय में अपील दायर की। अपील की विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए चारों आरोपियों को दोषी मानते हुए सख्त सजा सुनाई।
इस फैसले को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े परीक्षा फर्जीवाड़ों में से एक माना जा रहा है। न्यायालय के इस निर्णय ने न केवल दोषियों को कठघरे में खड़ा किया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर लगे दाग को भी उजागर कर दिया है। यह फैसला आने वाले समय में परीक्षा तंत्र में अनियमितता करने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।











