
नवा रायपुर में आयोजित हुई मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17वीं अहम बैठक
KPN24:- छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में आज आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17वीं बैठक में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच सामाजिक-आर्थिक विकास, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित अंतर्राज्यीय मुद्दों के निराकरण और बेहतर आपसी समन्वय को लेकर व्यापक मंथन हुआ।
बैठक में कुल 50 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनका सीधा असर मध्य क्षेत्र के राज्यों के विकास और सुशासन पर पड़ेगा।
बैठक के दौरान प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक विषयों से जुड़े जमीनी मुद्दों के समाधान पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करने तथा विकास परियोजनाओं में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करने के उपायों पर सहमति बनी। बैठक में मौजूद अधिकारियों को चारों राज्यों की नवाचारपूर्ण पहलों और बेस्ट प्रैक्टिसेस से भी रू-ब-रू होने का अवसर मिला।
मुख्य बैठक से पहले एजेंडा तय करने में अहम भूमिका
मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की यह बैठक इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसमें परिषद की मुख्य बैठक से पूर्व एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाता है। यहां लिए गए निर्णय और सिफारिशें आगामी परिषद बैठक में प्रस्तुत की जाती हैं। बैठक में लंबित अंतर्राज्यीय मामलों के समाधान, नीतिगत समन्वय को सुदृढ़ करने और विकास कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने पर विशेष फोकस रहा।
वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
बैठक की अध्यक्षता मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील ने की। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्राज्यीय परिषद सचिवालय के सचिव आशीष श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव श्रीमती शुभा ठाकुर, मध्यप्रदेश की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरुण शामी, उत्तरप्रदेश के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा, उत्तराखंड के प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुंधाशु सहित केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि निरंतर संवाद और सहयोग के माध्यम से मध्य क्षेत्र के राज्यों के साझा हितों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं, केन्द्रीय सचिव आशीष श्रीवास्तव ने बैठक के निष्कर्षों के अनुरूप राज्यों से त्वरित कार्यवाही के निर्देश देते हुए कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर संवाद से साझा समस्याओं के व्यावहारिक समाधान संभव होंगे।
इन मंत्रालयों से जुड़े विषयों पर हुई व्यापक चर्चा
बैठक में पंचायती राज, गृह, कानून एवं न्याय, सहकारिता, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, ऊर्जा, आवास एवं शहरी विकास, ग्रामीण विकास, रेल, खान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, कोयला, नागरिक उड्डयन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल जीवन मिशन, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, वित्त सेवा, डाक, पशुपालन एवं डेयरी, वाणिज्य और मत्स्य पालन सहित अनेक मंत्रालयों एवं विभागों से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
चारों राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेस बनीं आकर्षण का केंद्र
बैठक के दौरान अंतर्राज्यीय समन्वय, विकास और सुशासन के साथ-साथ राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेस का भी प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया गया।
छत्तीसगढ़ ने वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0, ब्लॉकचेन आधारित भूमि अभिलेख प्रणाली (दंतेवाड़ा मॉडल) और एआई-आधारित विद्या समीक्षा केंद्र को राष्ट्रीय स्तर की अभिनव पहल के रूप में प्रस्तुत किया।
मध्यप्रदेश ने ग्रामीण पर्यटन विकास, नवीकरणीय ऊर्जा नीति-2025 और पीएम श्री टूरिज्म हेली सर्विस की जानकारी साझा की।
उत्तराखंड ने किसान-से-आईटीबीपी आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम और जल स्रोत पुनर्जीवन की पहलों को सामने रखा।
उत्तरप्रदेश ने शहरी आवास सुधार, श्रम न्याय सेतु पोर्टल और सेवा मित्र जैसे नवाचारों पर प्रस्तुतीकरण दिया।










