
किराना दुकान से हर महीने 20 से 25 हजार रुपये की आय, पूरे गांव के लिए बनीं प्रेरणा
KPN24.com रायपुर 09 अप्रैल 2026
एक समय माओवाद प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले कोंडागांव जिले का दूरस्थ ग्राम कुधुर अब विकास और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनता जा रहा है। शासन की योजनाओं का लाभ अब गांव-गांव तक पहुंच रहा है और इसी बदलाव की सशक्त तस्वीर बनकर उभरी हैं ग्राम कुधुर की निवासी श्रीमती रमशीला कश्यप, जिन्होंने अपने साहस और मेहनत से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख दी है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर रमशीला कश्यप ने अपने जीवन को नई दिशा दी। वर्ष 2018 में उन्होंने ‘जय मां दंतेश्वरी’ स्व-सहायता समूह की सदस्य बनकर आत्मनिर्भर बनने की शुरुआत की। उस समय गांव में केवल एक ही किराना दुकान थी, जिसके कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लगभग 20 किलोमीटर दूर मर्दापाल जाना पड़ता था।
ग्रामीणों की इस समस्या को समझते हुए रमशीला कश्यप ने साहसिक निर्णय लेते हुए गांव में ही किराना दुकान शुरू करने का संकल्प लिया। स्व-सहायता समूह के माध्यम से मिली 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता से उन्होंने दुकान की शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने दुकान में रोजमर्रा की जरूरतों का सामान बढ़ाया और अपने छोटे व्यवसाय को मजबूत आधार दिया।
आज रमशीला कश्यप की यह छोटी-सी पहल पूरे गांव के लिए बड़ी सुविधा बन चुकी है। अब ग्रामीणों को आवश्यक वस्तुओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। वहीं दूसरी ओर इस व्यवसाय ने रमशीला के परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती दी है। वर्तमान में वे हर महीने लगभग 20 से 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
पहले केवल खेती पर निर्भर रहने वाला उनका परिवार अब अतिरिक्त आय के साथ अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बन गया है। रमशीला कश्यप की यह सफलता सिर्फ उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा की मिसाल बन गई है।
आज वे गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रेरित कर रही हैं। रमशीला कश्यप ने अपनी इस सफलता के लिए शासन की योजनाओं और प्रशासनिक सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया है।










