
लोक शिक्षण संचालनालय और डीईओ के निर्देशों का नहीं हुआ पालना, सवालों पर तहसीलदार बोले– “कार्यालय में कर्मचारियों की कमी है”
KPN24.com जांजगीर-चांपा-बलौदा 09 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सभी विभागों में संलग्नीकरण (अटैचमेंट) समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बाद भी बलौदा तहसील कार्यालय में शिक्षा विभाग के दो कर्मचारी अब तक कार्यरत हैं। शासन और जिला शिक्षा अधिकारी के स्पष्ट आदेशों के बावजूद कर्मचारियों की कार्यमुक्ति नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर के पत्र क्रमांक एम.आई.एस./N-123/445, दिनांक 26 जून 2026 में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अन्य विभागों अथवा अन्य स्थानों पर संलग्न कर्मचारियों को एकतरफा कार्यमुक्त करते हुए तत्काल उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाए। इसके पालन में जिला शिक्षा अधिकारी, जांजगीर-चांपा ने आदेश क्रमांक 3863/स्था.02/2026, दिनांक 01 जुलाई 2026 जारी कर सभी संबंधित कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त होकर अपने मूल संस्था में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए।
इसके बावजूद बलौदा तहसील कार्यालय में शिक्षा विभाग के दो कर्मचारी अब भी कार्यरत हैं। इनमें श्री विशाल वैभव, सहायक ग्रेड-02, जिनकी मूल पदस्थापना विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बलौदा में है तथा श्री अमित कुमार तम्बोली, सहायक ग्रेड-02, जिनकी मूल पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बुडगहन में है।
जब इस संबंध में तहसीलदार टिकेन्द्र नुरेटी बलौदा से पूछा गया कि शासन और जिला शिक्षा अधिकारी के स्पष्ट आदेशों के बावजूद दोनों कर्मचारियों को अब तक कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया तथा क्या यह आदेशों के पालन में देरी नहीं है? इस पर तहसीलदार ने कहा कि “हमारे कार्यालय में भी कर्मचारियों की कमी है। हम इस संबंध में अपने उच्च अधिकारियों से चर्चा कर रहे हैं। आवश्यक निर्देश मिलने के बाद शिक्षा विभाग के दोनों कर्मचारियों को पदभार मुक्त कर दिया जाएगा।”
हालांकि, तहसीलदार के इस जवाब के बाद कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं। जब शासन ने स्पष्ट रूप से संलग्नीकरण समाप्त करने और तत्काल मूल पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण कराने के निर्देश दिए हैं, तब उनके पालन में विलंब किस आधार पर किया जा रहा है? यदि कर्मचारियों की कमी ही कारण है, तो क्या शासन से कोई विशेष अनुमति प्राप्त की गई है?
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी उठ रहा है। जिन कर्मचारियों की मूल पदस्थापना शिक्षा विभाग में है, वहां कार्यालयीन कार्य प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विद्यार्थियों से जुड़े विभाग में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक नहीं है जितना अन्य विभागों में प्रशासनिक कार्यों का संचालन?
अब निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों पर हैं कि शासन के स्पष्ट आदेशों का पालन कब तक सुनिश्चित किया जाएगा और शिक्षा विभाग के इन कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण कराने की कार्रवाई कब पूरी होगी।










