
मनीष विद्यार्थी महेश्वर मध्यप्रदेश
KPN24.com महेश्वर 23 जुलाई 2026
महेश्वर की विश्वविख्यात महेश्वरी साड़ी की गौरवशाली हथकरघा परंपरा को एक बार फिर राष्ट्रीय पहचान मिलने जा रही है। महेश्वर के प्रतिभाशाली हथकरघा शिल्पी कमल गौड़ का चयन भारत सरकार के वर्ष 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार के लिए किया गया है। यह सम्मान उन्हें महेश्वरी साड़ी निर्माण में उत्कृष्ट शिल्प कौशल, पारंपरिक बुनाई कला के संरक्षण, नवाचार और हथकरघा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से महेश्वर सहित पूरे निमाड़ अंचल में खुशी और उत्साह का माहौल है।
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत विकास आयुक्त (हथकरघा), नई दिल्ली द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर 7 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र, नई दिल्ली में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। समारोह में वर्ष 2025 के राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार एवं संत कबीर हथकरघा पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इसी गरिमामय अवसर पर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु अपने करकमलों से हथकरघा शिल्पी कमल गौड़ को राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार से सम्मानित करेंगी।
महेश्वर की पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में अहम योगदान
महेश्वर की पहचान केवल ऐतिहासिक धरोहरों, माँ नर्मदा के पावन घाटों और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की गौरवशाली विरासत तक सीमित नहीं है। यहां की विश्वप्रसिद्ध महेश्वरी साड़ी ने भी महेश्वर को देश-दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई है। सदियों पुरानी इस बुनाई परंपरा को पीढ़ियों से हथकरघा शिल्पी अपनी कला, मेहनत और हुनर से जीवंत बनाए हुए हैं।
कमल गौड़ ने भी वर्षों की साधना, परिश्रम और सृजनशीलता के माध्यम से इस समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महेश्वरी साड़ी की बारीक बुनाई, उत्कृष्ट गुणवत्ता और पारंपरिक स्वरूप को कायम रखते हुए नवाचार के साथ इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
एक शिल्पी का सम्मान, पूरी हथकरघा परंपरा का गौरव
कमल गौड़ का राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार के लिए चयन महज एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि महेश्वर की सदियों पुरानी हथकरघा विरासत और पूरे बुनकर समाज के सम्मान का विषय है। यह सम्मान उन तमाम शिल्पियों के हुनर और समर्पण को भी नई पहचान देगा, जो अपने हाथों की कला से महेश्वर की सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार हथकरघा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिल्पियों को प्रदान किए जाने वाले देश के प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल है। कमल गौड़ को मिलने वाला यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि महेश्वर की पारंपरिक बुनाई कला आज भी अपनी गुणवत्ता, मौलिकता और सांस्कृतिक विरासत के दम पर राष्ट्रीय पटल पर मजबूती से कायम है।
कमल गौड़ के चयन पर स्थानीय हथकरघा शिल्पियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे महेश्वर, निमाड़ अंचल और मध्यप्रदेश के लिए गौरव का ऐतिहासिक क्षण बताया है।










