
KPN24:- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र स्थित पोंड़ी गांव इन दिनों एक बड़े फर्जीवाड़े के मामले को लेकर चर्चा में है। गांव से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, यहां कुछ लोगों ने आदिवासी “बैगा” जाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरियां हासिल कर ली हैं। अब जब मामला धीरे-धीरे उजागर हो रहा है, तो गांव में दबी जुबान से इसकी चर्चा जोरों पर है, लेकिन लोग खुलकर बोलने से डर रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला लंबे समय से चल रहा था, लेकिन हाल ही में इसकी परतें खुलनी शुरू हुई हैं। बताया जा रहा है कि पोंड़ी गांव में कुछ व्यक्तियों ने खुद को अनुसूचित जनजाति वर्ग की ‘बैगा’ जाति का बताकर जाति प्रमाण पत्र हासिल किया और फिर आरक्षण का लाभ उठाकर सरकारी नौकरियों में नियुक्ति प्राप्त कर ली।
ग्रामीणों के मुताबिक, इन लोगों की संख्या 20 से 30 के बीच हो सकती है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी। कुछ लोगों ने दावा किया है कि यदि किसी ने इस विषय में बात करने या शिकायत करने की कोशिश की, तो उन्हें धमकाया गया और जान से मारने तक की धमकी दी गई है।
सरकार और प्रशासन से जांच की मांग
यह मामला न केवल फर्जी दस्तावेज तैयार करने का है, बल्कि इससे वास्तविक आदिवासी समुदाय के अधिकारों का भी हनन हो रहा है। जिन लोगों को संविधान द्वारा आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, वे इन फर्जी लोगों की वजह से नौकरी से वंचित रह जा रहे हैं।
अब सवाल यह है कि शासन-प्रशासन कब इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेगा और जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा? ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो लोग दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं।
यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के साथ एक बड़ा अन्याय भी है। फर्जी जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा यह मामला आने वाले दिनों में और भी गहराई से सामने आ सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर कब और कितना सख्त रुख अपनाती है।










